हरियाणा में मौसम ने किसानों को दिया बड़ा झटका, ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद
हरियाणा में मौसम का कहर
हिसार. हरियाणा के आसमान से आई आफत ने किसानों की मेहनत को बर्बाद कर दिया है। बुधवार को प्रदेश के कई क्षेत्रों में अचानक मौसम में बदलाव और तेज ओलावृष्टि ने हिसार, सिरसा, भिवानी और रेवाड़ी के ग्रामीण इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में कटाई के लिए तैयार खड़ी गेहूं की फसल तेज हवाओं और ओलों के प्रहार से गिर गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति (Lodging) में गेहूं के दाने काले पड़ने और उनका वजन कम होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे उत्पादन में भारी कमी आने की संभावना है।
आने वाले दिनों में और संकट
3 अप्रैल से फिर संकट के आसार
इस अप्रत्याशित बारिश ने मार्च के अंत में बढ़ती गर्मी को तो रोका है, लेकिन जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य के औसत न्यूनतम तापमान में 1.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है, जिससे लोगों को अप्रैल की शुरुआत में भी गर्म कपड़े पहनने पड़े हैं। वर्तमान में हरियाणा का अधिकतम तापमान 32.5 डिग्री और न्यूनतम 17.1 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। हालांकि, राहत की उम्मीदें कम हैं। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, 1 और 2 अप्रैल को उत्तर हरियाणा में हल्की बारिश के बाद 3 से 5 अप्रैल के बीच एक नया और अधिक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जो फिर से आंधी और बारिश लाएगा।
फसलों पर व्यापक प्रभाव
सब्जियों और सरसों पर भी पड़ा बुरा असर
बारिश और ओलों का असर केवल अनाज तक सीमित नहीं रहा है। महेंद्रगढ़ और भिवानी जैसे जिलों में सरसों की पकी हुई फसल की फलियां गिर गई हैं, जिससे तेल की मात्रा और गुणवत्ता प्रभावित होगी। इसके अलावा, बेल वाली सब्जियों जैसे ककड़ी, घीया और तोरई के फूल गिरने से बागवानी करने वाले किसानों को भी नुकसान हुआ है। मंडियों में तिरपाल और जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण खुले में रखी सरसों की बोरियां भीगने की खबरें आ रही हैं। सरकार ने गिरदावरी (फसल नुकसान का आकलन) के आदेश दिए हैं, लेकिन किसान अभी भी आसमान की ओर देख रहे हैं कि कब यह आफत थमेगी।
