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हरियाणा में रबी फसलों की मार्केटिंग में सरसों के दामों में उछाल

हरियाणा में रबी फसलों की मार्केटिंग का सीजन शुरू होते ही सरसों के दामों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। सोनीपत जिले की गोहाना अनाज मंडी में एक किसान ने अपनी सरसों 7,015 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बेची, जो इस सीजन का सबसे ऊंचा दाम है। सरकारी खरीद केंद्रों की तुलना में निजी खरीदारों की सक्रियता बढ़ी है, जिससे किसानों को नकद और तात्कालिक भुगतान का लाभ मिल रहा है। जानें इस विषय में और क्या चल रहा है।
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हरियाणा में रबी फसलों की मार्केटिंग में सरसों के दामों में उछाल

सोनीपत में सरसों की बिक्री का नया रिकॉर्ड

सोनीपत. हरियाणा में रबी फसलों की मार्केटिंग का सीजन शुरू होते ही सरसों उत्पादक किसानों के लिए खुशखबरी आई है। सोनीपत जिले की गोहाना अनाज मंडी में सोमवार को एक ऐतिहासिक घटना हुई, जब गांव तिहाड़ मलिक के किसान विकास मलिक की सरसों की बिक्री 7,015 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर हुई। यह इस सीजन में अब तक का सबसे ऊंचा मूल्य है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने इस विपणन सत्र के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 6,200 रुपये निर्धारित किया है, लेकिन मंडी में मिल रहे उच्च दामों ने सरकारी खरीद केंद्रों की स्थिति को कमजोर कर दिया है।


निजी खरीदारों की बढ़ती भूमिका

निजी खरीदारों की सक्रियता और पेमेंट का 'इंस्टेंट' मॉडल


वर्तमान बाजार की स्थिति को देखते हुए, हरियाणा की मंडियों में सरकारी एजेंसियों (HAFED और HAIC) की तुलना में निजी व्यापारी अधिक सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। रेवाड़ी, हिसार और सिरसा जैसी प्रमुख मंडियों में सरसों के दाम 6,400 से 6,900 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। किसानों द्वारा निजी हाथों में फसल बेचने का एक बड़ा कारण 'नकद और तात्कालिक भुगतान' है। सरकारी केंद्रों पर तकनीकी समस्याओं और भुगतान में देरी के कारण किसान ओपन मार्केट को प्राथमिकता दे रहे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल के माध्यम से सभी किसानों को सुविधाएं प्रदान की जाएं, लेकिन जमीनी स्तर पर निजी क्षेत्र का प्रभाव बना हुआ है।


सरसों की गुणवत्ता पर ध्यान

40% तेल मात्रा पर टिकी नजरें


गोहाना मंडी के मार्केट कमेटी सचिव के अनुसार, जिन किसानों की सरसों में नमी की मात्रा कम (8% से नीचे) और तेल की मात्रा 40% से अधिक है, उन्हें व्यापारी ऊंचे दामों पर खरीद रहे हैं। रिकॉर्ड दाम पाने वाले किसान विकास मलिक ने बताया कि उन्होंने फसल की सुखाने और सफाई पर विशेष ध्यान दिया था, जिसका परिणाम उन्हें 7,015 रुपये के भाव के रूप में मिला। मंडी प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल को पूरी तरह सुखाकर लाएं, क्योंकि नमी वाली फसल पर 5,800 रुपये तक के कम दाम भी मिल रहे हैं।


गेहूं की खरीद की तैयारी

गेहूं की खरीद और मंडियों में सुविधाएं


सरसों की आवक के साथ ही 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद भी शुरू होने जा रही है। सरकार ने इसके लिए 416 केंद्र स्थापित किए हैं। गोहाना सहित सभी मंडियों में किसानों के लिए अटल कैंटीन में 10 रुपये में थाली, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। हालांकि, ई-खरीद पोर्टल की धीमी गति और बारदाना (जूट बैग) की कमी की शिकायतों ने शुरुआती दिनों में कुछ कठिनाइयाँ पैदा की हैं, जिन्हें प्रशासन दूर करने का प्रयास कर रहा है।