हरियाणा में संपत्ति दरों में भारी वृद्धि, रियल एस्टेट पर असर
गुरुग्राम में संपत्ति की कीमतों में वृद्धि
गुरुग्राम. हरियाणा में घर बनाने या व्यावसायिक निवेश करने का सपना अब महंगा हो गया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने वर्ष 2026-27 के लिए सभी जिलों के नए कलेक्टर रेट (सर्कल रेट) की दरें जारी की हैं। यह पिछले दो वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी वृद्धि है, जो सीधे स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क को प्रभावित करेगी। एनसीआर के शहरों जैसे गुरुग्राम और फरीदाबाद में आवासीय और कृषि भूमि की दरों में 75% तक की वृद्धि की गई है, जिससे रियल एस्टेट बाजार में हलचल बढ़ गई है।
गुरुग्राम और फरीदाबाद: पॉश इलाकों में भारी उछाल
गुरुग्राम के प्रीमियम क्षेत्रों में कीमतों में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई है। बजघेड़ा में एक एकड़ कृषि भूमि का मूल्य 4.30 करोड़ रुपये से बढ़कर 7.53 करोड़ रुपये होने जा रहा है। इसी तरह, गोल्फ कोर्स रोड और द्वारका एक्सप्रेसवे के निकट सेक्टरों में 45% से 67% तक की वृद्धि प्रस्तावित है। फरीदाबाद में भी ग्रेटर फरीदाबाद के नीमका और फरीदपुर जैसे क्षेत्रों में रिहायशी जमीन की कीमतें 75% तक बढ़ गई हैं। सेक्टर-14 जैसे पॉश इलाकों में दरें 58,000 रुपये से बढ़कर 92,800 रुपये प्रति वर्ग गज तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे मध्यम वर्ग के लिए जमीन खरीदना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
अग्रोहा में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
हिसार जिले के अग्रोहा क्षेत्र में व्यावसायिक संपत्तियों में 30% और कृषि भूमि में 75% की वृद्धि का प्रस्ताव है। पॉश सेक्टर-13 और 14P में रिहायशी दरें 56,925 रुपये प्रति वर्ग गज तक पहुंच सकती हैं। पंचकूला में भी स्थिति कुछ ऐसी ही है, जहाँ सेक्टर-19, 27 और 28 में आवासीय भूमि के रेट 75% बढ़ाए गए हैं। सेक्टर-17 के प्राइम कमर्शियल हब में भी रजिस्ट्री शुल्क का बोझ बढ़ने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार सरकारी दरों और मार्केट रेट के बीच के अंतर को कम करने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसका सीधा असर निवेश और निर्माण लागत पर पड़ेगा।
रजिस्ट्री के नियमों में बदलाव और प्रभाव
नए कलेक्टर रेट लागू होने के बाद, किसी भी संपत्ति का पंजीकरण नई अधिसूचित दरों से कम नहीं किया जा सकेगा। यदि किसी प्रॉपर्टी की मार्केट वैल्यू कलेक्टर रेट से कम भी है, तो भी रजिस्ट्री सरकारी दरों पर ही होगी। रेवाड़ी में भी सेक्टर-4 और मॉडल टाउन के आसपास के क्षेत्रों को छोड़कर अधिकतर इलाकों में बदलाव किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इससे सरकार के राजस्व में लगभग 18% की वृद्धि होने की उम्मीद है। हालांकि, प्रॉपर्टी डीलरों और आम जनता ने इस 'अत्यधिक' वृद्धि को रियल एस्टेट सेक्टर के लिए नुकसानदेह बताया है।
