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हावर्ड यूनिवर्सिटी ने संस्कृत कार्यक्रम पर विवाद के लिए मांगी माफी

हावर्ड यूनिवर्सिटी के साउथ एशियन डिपार्टमेंट ने संस्कृत कार्यक्रम की नकारात्मक छवि प्रस्तुत करने के लिए माफी मांगी है। इस विवाद पर कई हिंदू संगठनों ने आलोचना की है। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस पोस्ट का लक्ष्मी मित्तल से कोई संबंध नहीं है। हावर्ड ने संस्कृत के महत्व और इसके अध्ययन के इतिहास पर भी प्रकाश डाला है। जानें इस मामले में और क्या कहा गया है।
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हावर्ड यूनिवर्सिटी ने संस्कृत कार्यक्रम पर विवाद के लिए मांगी माफी

संस्कृत कार्यक्रम पर माफी

वाशिंगटन: हावर्ड यूनिवर्सिटी के साउथ एशियन डिपार्टमेंट ने हाल ही में एक पोस्ट के कारण संस्कृत कार्यक्रम की नकारात्मक छवि प्रस्तुत करने के लिए माफी मांगी है। कई हिंदू संगठनों ने विश्वविद्यालय के इस व्यवहार की आलोचना की है। हावर्ड यूनिवर्सिटी ने एक बयान में कहा कि यहां संस्कृत भाषा और इसकी परंपरा का अध्ययन करने का एक समृद्ध इतिहास है। भविष्य में, सोशल मीडिया पर किए जाने वाले सभी पोस्ट विभाग की गरिमा के अनुरूप होंगे।


यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि इस विवाद का उससे कोई संबंध नहीं है। इसके अलावा, इस पोस्ट का लक्ष्मी मित्तल और उनके परिवार से भी कोई संबंध नहीं है। मित्तल इंस्टीट्यूट ने भी इस मामले में विश्वविद्यालय के बयान का समर्थन किया है। हावर्ड ने कहा कि संस्कृत ने दक्षिण एशिया में भाषाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसे भगवान की भाषा भी कहा जाता है। यह भाषा रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों में भी महत्वपूर्ण है।


उत्तर अमेरिका के हिंदू संगठनों ने भी विश्वविद्यालय के बयान का समर्थन किया है। साउथ एशियन विभाग में संस्कृत के कई प्रारंभिक और उन्नत पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। संस्कृत का भारत के शिक्षित और धार्मिक रूप से जागरूक समाज में एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसने कई दक्षिण एशियाई भाषाओं को समृद्ध किया है। अमेरिका और कनाडा में कई आयोजनों में संस्कृत से जुड़े लोगों ने ध्यान आकर्षित किया है।