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हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र: जलवायु संकट और आर्थिक चुनौतियों का सामना

हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र, जो एशिया की प्रमुख नदियों का स्रोत है, अब गंभीर जलवायु और आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि इस क्षेत्र को 2020 से 2050 के बीच 12 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होगी। भारत और चीन पर इस फंडिंग का बड़ा हिस्सा है। रिपोर्ट में जलवायु संवेदनशीलता और आर्थिक क्षमता के बीच के अंतर को भी उजागर किया गया है। जानें इस क्षेत्र की चुनौतियों और संभावित समाधानों के बारे में।
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हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र: जलवायु संकट और आर्थिक चुनौतियों का सामना

हिंदू कुश हिमालय का महत्व


नई दिल्ली: हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र एशिया की कई प्रमुख नदियों का स्रोत है, जो अरबों लोगों के लिए जीवनदायिनी है। हालाँकि, यह क्षेत्र अब गंभीर आर्थिक और जलवायु संकट का सामना कर रहा है। एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता मौजूदा प्रतिबद्धताओं से बहुत कम है।


आवश्यक फंडिंग की मात्रा

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि समय पर पर्याप्त संसाधन नहीं जुटाए गए, तो जल, खाद्य सुरक्षा और करोड़ों लोगों की आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2050 के बीच इस क्षेत्र को लगभग 12 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होगी।


हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र का विस्तार

यह क्षेत्र आठ देशों - अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, भारत, म्यांमार, नेपाल और पाकिस्तान - में फैला हुआ है। इसकी कुल लंबाई लगभग 3,500 किलोमीटर है और एशिया के जल चक्र में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।


भारत और चीन की जिम्मेदारी

रिपोर्ट के अनुसार, अनुमानित फंडिंग की आवश्यकता का लगभग 92.4 प्रतिशत हिस्सा केवल भारत और चीन पर है। रिपोर्ट के लेखक गुलाम अली ने कहा कि 12 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य प्राप्त करना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि संसाधनों को जुटाने की रणनीति रचनात्मक, व्यापक और सामूहिक होनी चाहिए।


नीतियों की भूमिका

इस क्षेत्र में जलवायु वित्तपोषण के लिए नीतियों का विकास और प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक है। रिपोर्ट का उद्देश्य क्षेत्र की आर्थिक आवश्यकताओं को समझना और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आवश्यक कदम उठाना है।


जलवायु जोखिम और आर्थिक क्षमता

रिपोर्ट में जलवायु संवेदनशीलता और वित्तीय क्षमता के बीच के बड़े अंतर को उजागर किया गया है। बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल और पाकिस्तान जैसे देश जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित हैं, लेकिन इनकी तैयारी सबसे कमजोर है।


अधिक बोझ का सामना

हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र को वैश्विक औसत से अधिक अनुकूलन का बोझ उठाना पड़ रहा है। अफगानिस्तान, नेपाल और पाकिस्तान जैसे देशों को अपनी आय वर्ग के औसत से अधिक खर्च करना पड़ रहा है, जिससे वे सीमित संसाधनों के साथ बार-बार मरम्मत और आपात उपायों में फंस जाते हैं।


आर्थिक समानता का संकट

रिपोर्ट इस स्थिति को आर्थिक समानता के बड़े सवाल से जोड़ती है। नीति-निर्माताओं को कमजोर आबादी के लिए विकास और अस्तित्व के बीच कठिन चुनाव करना पड़ता है। बांग्लादेश, जो अत्यधिक जलवायु संवेदनशील है, जलवायु जोखिमों को प्रबंधित करने के लिए सबसे कम तैयार है।


ग्लेशियरों का पिघलना

हिंदू कुश हिमालय के ग्लेशियर लगभग दो अरब लोगों को पानी प्रदान करते हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि वैश्विक तापमान 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ता है, तो सदी के अंत तक ये ग्लेशियर अपनी 75 प्रतिशत बर्फ खो सकते हैं, जिससे नदियों के प्रवाह और जल सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।