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हिमंता बिस्वा सरमा ने असम में दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली

असम की राजनीति में मंगलवार को एक ऐतिहासिक दिन रहा जब हिमंता बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वह असम के पहले गैर-कांग्रेसी नेता हैं जिन्होंने दो कार्यकाल पूरे किए हैं। इस समारोह में कई प्रमुख नेता शामिल हुए। सरमा का राजनीतिक सफर और शिक्षा भी काफी दिलचस्प है, जिसमें उन्होंने छात्र राजनीति से शुरुआत की और भाजपा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जानें उनके जीवन के बारे में और अधिक जानकारी।
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हिमंता बिस्वा सरमा ने असम में दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली

मुख्यमंत्री पद की शपथ समारोह

दिसपुर- असम की राजनीति में मंगलवार का दिन एक महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया, जब हिमंता बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया। इस अवसर पर वह असम के पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए हैं, जिन्होंने दो कार्यकाल पूरे किए हैं। गुवाहाटी में आयोजित एक भव्य समारोह में राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उन्हें पद की शपथ दिलाई।


एनडीए सरकार का तीसरा कार्यकाल

राज्यपाल ने उन्हें एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया। यह असम में एनडीए सरकार का तीसरा कार्यकाल है। 2016 में भाजपा के नेतृत्व में सर्बानंद सोनोवाल ने पहली बार मुख्यमंत्री पद संभाला था, जबकि 2021 में हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य की कमान संभाली। इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए।


राजनीतिक सफर और शिक्षा

हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। 2015 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया। उस समय असम में कांग्रेस का प्रभाव था और भाजपा के पास केवल पांच विधायक थे। सरमा ने भाजपा को पूर्वोत्तर में मजबूत करने के लिए कई रणनीतियाँ अपनाईं। 2016 में उन्हें नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एनईडीए) का संयोजक बनाया गया।


उनकी शिक्षा गुवाहाटी में हुई। उन्होंने कामरूप अकादमी से स्कूली शिक्षा प्राप्त की और फिर कॉटन कॉलेज से राजनीति विज्ञान में बीए और एमए की डिग्री हासिल की। इसके बाद गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की और कुछ समय तक गुवाहाटी हाईकोर्ट में वकालत की। 2006 में उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।


छात्र राजनीति से शुरुआत

उनका राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। 1991-92 में वह कॉटन कॉलेज छात्र संघ के महासचिव रहे और बाद में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) से जुड़े। 1990 के दशक में उन्होंने कांग्रेस में प्रवेश किया और 2001 में जालुकबारी सीट से पहली बार विधायक बने। दिलचस्प बात यह है कि वह इस सीट से लगातार जीतते आ रहे हैं।