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हिमाचल प्रदेश में वृद्धावस्था पेंशन घोटाला: 44 साल के लोग बने बुजुर्ग

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में पंचायत चुनावों के दौरान एक बड़ा पेंशन घोटाला सामने आया है, जिसमें 44 से 54 साल के लोग फर्जी तरीके से वृद्धावस्था पेंशन का लाभ उठा रहे थे। इस मामले की जांच में पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों में एफआईआर दर्ज की है। प्रारंभिक जांच में 45 संदिग्ध लाभार्थियों की पहचान की गई है, जिनकी वास्तविक उम्र पेंशन के नियमों के अनुसार नहीं है। इस घोटाले में पंचायत सचिव और अन्य सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
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हिमाचल प्रदेश में वृद्धावस्था पेंशन घोटाला: 44 साल के लोग बने बुजुर्ग

शिमला में पंचायत चुनावों के बीच बड़ा घोटाला

शिमला: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों की हलचल के बीच, शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। तागनू-जांगलिख पंचायत में सरकारी दस्तावेजों के साथ ऐसी धांधली की गई कि 44 से 54 साल के लोग अचानक 'बुजुर्ग' बन गए और वर्षों तक वृद्धावस्था पेंशन का लाभ उठाते रहे। इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों में मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है।


पेंशन के लिए उम्र में हेरफेर

यह मामला जिला कल्याण अधिकारी शिमला द्वारा की गई एक ई-मेल शिकायत के बाद उजागर हुआ। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए थाना चिड़गांव में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत एफआईआर दर्ज की है। इन धाराओं के तहत आरोपियों पर धोखाधड़ी, सरकारी दस्तावेजों में जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करने के गंभीर आरोप लगे हैं। जांच में यह सामने आया है कि 2021 से 2025 के बीच फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों के आधार पर कई अपात्र व्यक्तियों को पेंशन की सूची में शामिल किया गया।


फर्जी बुजुर्गों की पहचान

हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों को वृद्धावस्था पेंशन दी जा रही थी, उनकी वास्तविक उम्र पेंशन के नियमों के अनुसार नहीं थी। प्रारंभिक जांच में लगभग 45 संदिग्ध लाभार्थियों की पहचान की गई है, जिनकी उम्र 44 से 54 वर्ष के बीच है। इनमें तागनू गांव के 20 और जांगलिख क्षेत्र के 25 पुरुष और महिलाएं शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन लोगों को पात्र दिखाने के लिए पंचायत के 'परिवार रजिस्टर' में बड़े पैमाने पर हेरफेर की गई।


जांच में पंचायत सचिव की भूमिका

ग्रामीणों के बीच इस धांधली की चर्चा लंबे समय से थी, लेकिन अब आधिकारिक जांच शुरू होने के बाद रिकॉर्ड की परतें खुलने लगी हैं। अधिकारियों को संदेह है कि बिना किसी अंदरूनी मिलीभगत के इतनी बड़ी संख्या में सरकारी रिकॉर्ड को बदलना संभव नहीं है। इसलिए तत्कालीन पंचायत सचिव और कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पुलिस अब पंचायत से जारी परिवार रजिस्टर की नकल, पेंशन आवेदन और सत्यापन से जुड़े दस्तावेजों को कब्जे में लेकर इस सिंडिकेट के मास्टरमाइंड का पता लगाने में जुटी है।


कठोर कार्रवाई की तैयारी

इस मामले के सामने आने के बाद कल्याण विभाग में हड़कंप मच गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों की गहन जांच के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि फर्जीवाड़ा किस स्तर पर हुआ और सरकारी खजाने को कितना नुकसान पहुंचाया गया। इस कार्रवाई के बाद पंचायत में हड़कंप मच गया है और कई 'नकली बुजुर्ग' अब कानूनी कार्रवाई के डर से भूमिगत हो गए हैं।