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हुमायूं कबीर का चैलेंज: कुर्बानी पर विवाद बढ़ा

कोलकाता में उन्नयन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने कुर्बानी को लेकर विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को खुला चैलेंज देते हुए कहा कि जो जानवर कुर्बानी के लिए हैं, उनकी कुर्बानी होगी। हुमायूं ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर कुर्बानी को रोकने की कोशिश की गई, तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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हुमायूं कबीर का चैलेंज: कुर्बानी पर विवाद बढ़ा

कोलकाता में हुमायूं कबीर का बयान


कोलकाता: भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद से विपक्षी दलों में असंतोष बढ़ गया है। ममता बनर्जी के कोर्ट जाने के बाद, अब उन्नयन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को खुला चैलेंज दिया है। हुमायूं ने कहा है कि जो जानवर कुर्बानी के लिए हैं, उनकी कुर्बानी होगी और इसे कोई नहीं रोक सकता।


पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 के तहत एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें मुसलमानों के लिए बीफ न खाने का नियम था। इस पर हुमायूं ने चुनौती दी है कि सरकार यह नियम तो बना सकती है, लेकिन धार्मिक कुर्बानी जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान का सम्मान करना आवश्यक है, लेकिन कुर्बानी अवश्य होगी।


हर जायज पशु की कुर्बानी का वादा

हर जायज पशु की होगी कुर्बानी: हुमायूं


हुमायूं ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि हर जायज पशु की कुर्बानी होगी, चाहे वह गाय, बकरा या ऊंट हो। उन्होंने राज्य सरकार को आगाह किया है कि कुर्बानी को रोकने की कोशिश की गई तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमान कुर्बानी से समझौता नहीं कर सकते।




स्लॉटर हाउस पर हुमायूं की मांग

स्लॉटर हाउस करें बंद:


हुमायूं ने यह भी कहा कि स्लॉटर हाउस बंद किए जाने चाहिए, क्योंकि 37% से अधिक मुस्लिम गाय खाते हैं। उनका कहना है कि इन स्लॉटर हाउस को सरकार द्वारा लाइसेंस दिया गया है और सरकार बीफ को बाहर भेजकर पैसा कमाती है। क्या सरकार वास्तव में इन स्थानों को बंद कर देगी? इसके अलावा, नमाज पढ़ने के मामले में भी हुमायूं ने कहा कि सरकार को बड़ा मैदान उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि नमाज पढ़ी जा सके। अगर ऐसा नहीं होता है, तो सड़क पर नमाज पढ़ना मजबूरी बन जाएगा।


बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस मामले को धर्म से जोड़कर देखना उचित नहीं है। सड़क पर नमाज पढ़ना कोई परंपरा नहीं है, बल्कि यह लोगों द्वारा बनाए गए नियम हैं। एई, सऊदी अरब या ईरान जैसे इस्लामिक देशों में सड़क पर नमाज पढ़ने पर रोक है। उल्लेखनीय है कि 27 मई को ईद से पहले सरकार ने एक सार्वजनिक सूचना जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के गाय और भैंस का वध करना प्रतिबंधित है।