होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव: ईरान की नई फीस और भारत का रुख
वैश्विक चर्चा का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर से वैश्विक विमर्श का विषय बन गया है। ईरान द्वारा कुछ जहाजों से भारी ट्रांजिट शुल्क वसूलने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग में हलचल मचा दी है। भारत, जो इस मार्ग पर ऊर्जा आपूर्ति के लिए काफी हद तक निर्भर है, ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर स्वतंत्र और सुरक्षित नेविगेशन का समर्थन करता रहेगा। हालांकि, भारतीय जहाजों की स्थिति को लेकर कई सवाल अभी भी बने हुए हैं।
ईरान द्वारा वसूली जा रही 2 मिलियन डॉलर तक की फीस
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने हाल ही में दावा किया है कि कुछ जहाजों से 2 मिलियन डॉलर तक की फीस ली जा रही है। इसे उन्होंने देश की शक्ति का प्रतीक बताया। अमेरिका और इजराइल द्वारा फरवरी के अंत में किए गए हमलों के बाद से यह जलमार्ग और भी संवेदनशील हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है, वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% संभालता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की बाधा का प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
भारत का स्पष्ट रुख
भारत ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार के टोल पर कोई बातचीत नहीं हुई है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि इस जलमार्ग में स्वतंत्र और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित होनी चाहिए। ईरान ने भारत को 'मित्र देश' मानते हुए अभी तक भारतीय जहाजों को राहत दी है। हालांकि, भविष्य में स्थिति कैसी होगी, इस पर सरकार ने कोई अनुमान लगाने से इनकार किया है।
भारतीय जहाजों पर प्रभाव
जानकारी के अनुसार, अब तक कम से कम आठ भारतीय झंडे वाले एलपीजी टैंकर इस मार्ग से गुजर चुके हैं। फिर भी, शिपिंग कंपनियां सतर्क हैं और स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रही हैं। सरकार ने घरेलू स्तर पर गैस के उपयोग को संतुलित करने के लिए कदम उठाए हैं। इसका परिणाम यह हुआ है कि ग्रे मार्केट में कीमतें सामान्य से चार गुना तक बढ़ गई हैं। भारत अपनी तेल और गैस जरूरतों का लगभग 90% आयात करता है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।
अनिश्चितता और वैश्विक प्रभाव
हालांकि युद्धविराम की घोषणा हो चुकी है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। जहाजों की आवाजाही पहले की तुलना में काफी कम है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार प्राकृतिक जलमार्गों पर कोई ट्रांजिट शुल्क नहीं होना चाहिए, लेकिन यहां स्थिति अलग नजर आ रही है। ईरान ने इस क्षेत्र पर अपने नियंत्रण को औपचारिक रूप देने की बात भी कही है। दूसरी ओर, अमेरिका और यूरोप ने स्पष्ट किया है कि यहां बिना किसी शुल्क के आवाजाही सुनिश्चित होनी चाहिए। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और जटिल हो सकता है.
