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2025 का नया इनकम टैक्स कानून: जानें 10 महत्वपूर्ण बदलाव

वित्तीय वर्ष 2026 के अंत के साथ, 1 अप्रैल 2025 से नया इनकम टैक्स कानून लागू होने जा रहा है। यह कानून 1961 के पुराने कानून को प्रतिस्थापित करेगा और इसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं। नए कानून का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना और निवेश के माहौल को सुधारना है। जानें इस नए कानून के तहत आईटीआर फाइलिंग की समय सीमा, टैक्स छूट, और अन्य महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में।
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2025 का नया इनकम टैक्स कानून: जानें 10 महत्वपूर्ण बदलाव

नया इनकम टैक्स कानून लागू होने वाला है


नई दिल्ली: वित्तीय वर्ष 2026 का समापन अब कुछ ही घंटों में होने वाला है। 1 अप्रैल 2025 से नया वित्तीय वर्ष 2027 शुरू होते ही देश में नया इनकम टैक्स कानून लागू होगा। यह कानून 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा और इसे इनकम टैक्स एक्ट 2025 के नाम से जाना जाएगा। नए कानून का मुख्य उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना, निवेश के माहौल को सुधारना और आईटीआर फाइलिंग तथा विदेशी खर्चों से संबंधित नियमों में पारदर्शिता लाना है। आइए जानते हैं इस कानून के तहत होने वाले 10 महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में:


टैक्स वर्ष की नई परिभाषा

पहले आईटीआर भरते समय वित्तीय वर्ष और निर्धारण वर्ष के बीच भ्रम रहता था। नए कानून में इसे केवल 'टैक्स वर्ष' के रूप में परिभाषित किया गया है, जिससे यह भ्रम समाप्त हो जाएगा।


आईटीआर फाइलिंग की समय सीमा में बदलाव

सैलरी कर्मचारियों के लिए आईटीआर-1 और आईटीआर-2 जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई रहेगी। वहीं, स्वरोजगार करने वालों और व्यवसायियों के लिए राहत की बात यह है कि आईटीआर-3 और आईटीआर-4 जमा करने की अंतिम तिथि अब 31 अगस्त कर दी गई है।


डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग महंगी

डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग अब महंगी हो गई है। सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में वृद्धि की गई है। फ्यूचर और ऑप्शन (F&O) पर STT को 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया गया है। ऑप्शन प्रीमियम पर टैक्स और ऑप्शन पर एक्ससाइज भी बढ़कर क्रमशः 0.15 फीसदी हो जाएगा।


एचआरए क्लेम के लिए नए नियम

मकान किराया भत्ता (HRA) का लाभ तो मिलेगा, लेकिन इसके लिए अनुपालन को सख्त किया गया है। कर्मचारियों को अब मकान मालिक का पैन नंबर और किराए के भुगतान का वैध प्रमाण देना अनिवार्य होगा।


फूड कार्ड और गिफ्ट वाउचर पर टैक्स छूट

कंपनी द्वारा दिए जाने वाले फूड कार्ड (मील कार्ड) पर टैक्स छूट की सीमा 50 रुपये प्रति मील से बढ़ाकर 200 रुपये कर दी गई है। इसके अलावा, गिफ्ट कार्ड, वाउचर और कूपन पर सालाना टैक्स फ्री लिमिट 5,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दी गई है।


शेयर बायबैक और एसजीबी पर नया टैक्स

शेयर बायबैक पर अब पहले की तरह स्लैब रेट से टैक्स नहीं लगेगा, बल्कि इसे कैपिटल गेन के रूप में देखा जाएगा। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में भी बड़ा बदलाव हुआ है। अब सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए एसजीबी के रिडेम्पशन पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।


विदेश यात्रा पर टीसीएस में कमी

विदेश यात्रा पर सोर्स पर टैक्स कलेक्शन (TCS) में राहत दी गई है। पहले 10 लाख रुपये तक 5 फीसदी और इससे अधिक पर 20 फीसदी टीसीएस लगता था। अब कुल लागत पर 2 फीसदी की फ्लैट दर लागू होगी।


पैन नियमों में बदलाव

अब केवल आधार कार्ड के आधार पर पैन कार्ड के लिए आवेदन करना मान्य नहीं होगा। आवेदकों को अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे। इसके अलावा, 10 लाख रुपये से अधिक के कैश जमा, 5 लाख रुपये से अधिक के वाहनों की खरीद और 20 लाख रुपये से अधिक की अचल संपत्ति के लेन-देन पर पैन अनिवार्य होगा।


एनआरआई को राहत

अनिवासी भारतीयों (NRI) से जुड़ी संपत्ति के लेन-देन में अब खरीदार अपने पैन से टीडीएस काट सकेंगे, जिससे टीएएन (TAN) लेने की आवश्यकता नहीं रहेगी। इसके अलावा, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण से मिलने वाले मुआवजे पर मिला ब्याज अब पूरी तरह टैक्स फ्री होगा।