CBSE ने QR कोड के बारे में दी महत्वपूर्ण जानकारी, अफवाहों का किया खंडन
CBSE की नई एडवाइजरी
नई दिल्ली: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की परीक्षाओं के दौरान एक महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। हाल ही में, क्वेश्चन पेपर पर मौजूद क्यूआर (QR) कोड को लेकर सोशल मीडिया पर कई भ्रामक जानकारियाँ फैल रही थीं। इन अफवाहों को समाप्त करते हुए, बोर्ड ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। इस आधिकारिक सूचना में बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इन कोड्स का असली उद्देश्य क्या है और इन्हें परीक्षा के पेपर पर क्यों प्रिंट किया गया है।
क्यूआर कोड का असली उद्देश्य
कई लोगों का मानना था कि ये कोड इंटरनेट हाइपरलिंक हैं, जिन्हें स्कैन करने पर विशेष वेबसाइट खुलती है। हालांकि, CBSE ने अपनी एडवाइजरी में बताया है कि ये क्यूआर कोड इंटरनेट से सीधे जुड़ने के लिए नहीं बनाए गए हैं। बोर्ड के अनुसार, ये कोड ऑथेंटिकेशन, पेपर की ट्रैकिंग और परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए एक आंतरिक प्रणाली का हिस्सा हैं। जब कोई इन्हें स्कैन करता है, तो यह किसी वेब लिंक के रूप में नहीं खुलता, बल्कि केवल वही टेक्स्ट प्रदर्शित करता है जो इसमें एनकोड किया गया है।
गूगल सर्च से संबंधित जानकारी
बोर्ड ने स्कैनिंग के दौरान तकनीकी समस्याओं को भी स्पष्ट किया है। CBSE का कहना है कि जब कोई यूजर स्कैन किए गए टेक्स्ट पर गूगल सर्च का उपयोग करता है, तो कई बार गूगल सर्च इंजन उस टेक्स्ट से मिलते-जुलते अन्य शब्द या परिणाम दिखा सकता है, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। हालांकि, बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि गूगल क्रोम जैसे मानक वेब ब्राउजर पर कोड का उपयोग करने पर ऐसा नहीं होता। सभी छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे बिना वजह चिंता न करें और सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारियों पर ध्यान न दें।
