Henley Passport Index 2026: भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में सुधार
पासपोर्ट की ताकत और यात्रा की सुविधा
नई दिल्ली: वर्तमान समय में, पासपोर्ट केवल एक पहचान पत्र नहीं रह गया है, बल्कि यह यह दर्शाता है कि कोई व्यक्ति कितनी आसानी से वैश्विक स्तर पर यात्रा कर सकता है। किसी देश का पासपोर्ट जितना मजबूत होता है, उसके नागरिकों को उतने ही अधिक देशों में बिना वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा मिलती है। इसी आधार पर हर साल Henley Passport Index दुनिया के विभिन्न देशों के पासपोर्ट की रैंकिंग निर्धारित करता है।
Henley Passport Index 2026 की हालिया रिपोर्ट में एशियाई देशों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया इस सूची में शीर्ष स्थान पर हैं। भारत की रैंकिंग में भी इस बार सुधार हुआ है, और अब यह 80वें स्थान पर पहुंच गया है। भारतीय पासपोर्ट धारक अब 55 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं।
Henley Passport Index यह दर्शाता है कि किसी देश के नागरिक बिना पूर्व वीजा के कितने देशों में यात्रा कर सकते हैं। 2026 की रैंकिंग के अनुसार, सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया के पास दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट हैं। इन देशों के नागरिकों को सबसे अधिक देशों में बिना वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल के साथ यात्रा करने की सुविधा प्राप्त होती है।
भारतीय पासपोर्ट की स्थिति में 2026 में सुधार देखा गया है। इस वर्ष भारत 80वें स्थान पर है और भारतीय नागरिकों को 55 देशों में बिना वीजा यात्रा करने की अनुमति मिली है। यह पिछले वर्षों की तुलना में एक बेहतर स्थिति मानी जा रही है। वहीं, अफगानिस्तान का पासपोर्ट एक बार फिर सबसे कमजोर साबित हुआ है, क्योंकि अफगान पासपोर्ट धारक केवल 24 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं।
सबसे मजबूत और सबसे कमजोर पासपोर्ट के बीच 168 देशों का अंतर दर्ज किया गया है। इसका अर्थ यह है कि कुछ देशों के नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा बेहद सरल है, जबकि अन्य देशों के नागरिकों को यात्रा के लिए कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यह अंतर वर्ष 2006 के बाद से लगातार बढ़ता जा रहा है। Henley Passport Index 2026 यह स्पष्ट करता है कि किसी देश के पासपोर्ट की ताकत उसकी अंतरराष्ट्रीय स्थिति, कूटनीतिक संबंधों और वैश्विक भरोसे से गहराई से जुड़ी होती है।
