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SOCIAL ब्रांड को मिली बड़ी कानूनी जीत, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया वेल-नोन ट्रेडमार्क का दर्जा

SOCIAL, भारत के एक प्रमुख कैफे और रेस्टोरेंट ब्रांड, ने दिल्ली हाईकोर्ट से एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत हासिल की है। अदालत ने इसे 'वेल-नोन ट्रेडमार्क' का दर्जा दिया है, जिससे इसकी पहचान और ब्रांड वैल्यू को मान्यता मिली है। इस फैसले के पीछे की कहानी में ग्राहकों में भ्रम पैदा करने के आरोप और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं का जिक्र है। जानें इस फैसले का क्या मतलब है और SOCIAL की यात्रा के बारे में।
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SOCIAL ब्रांड को मिली बड़ी कानूनी जीत, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया वेल-नोन ट्रेडमार्क का दर्जा

नई दिल्ली में SOCIAL की कानूनी सफलता


नई दिल्ली: भारत के प्रसिद्ध रेस्टोरेंट और कैफे ब्रांड SOCIAL ने एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत हासिल की है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इसे ट्रेड मार्क्स एक्ट, 1999 के तहत 'वेल-नोन ट्रेडमार्क' का दर्जा दिया है। यह निर्णय इम्प्रेसारियो एंटरटेनमेंट एंड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर एक मुकदमे के संदर्भ में आया। अदालत ने यह माना कि SOCIAL ने वर्षों की मेहनत और विस्तार से देशभर में एक अलग पहचान बनाई है।


कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

न्यायमूर्ति तेजस करिया ने 9 जनवरी 2026 को दिए गए निर्णय में कहा कि SOCIAL ब्रांड ने समय के साथ एक विशिष्ट पहचान प्राप्त की है। इसकी देशभर में मौजूदगी और ग्राहकों के साथ मजबूत संबंध के कारण यह नाम अब इम्प्रेसारियो से जुड़ा हुआ माना जाता है। अदालत के अनुसार, यह पहचान इतनी गहरी है कि उपभोक्ता SOCIAL को किसी अन्य व्यवसाय से नहीं जोड़ते।


ग्राहकों में भ्रम की आशंका

यह मुकदमा 'द शेक सोशल' नामक एक डेजर्ट और बेवरेज आउटलेट के खिलाफ दायर किया गया था। इम्प्रेसारियो ने आरोप लगाया कि यह नाम SOCIAL से मिलता-जुलता है और इससे ग्राहकों में भ्रम उत्पन्न हो सकता है। कंपनी ने कहा कि दूसरा ब्रांड SOCIAL की लोकप्रियता का अनुचित लाभ उठा रहा है और उसकी ब्रांड वैल्यू को नुकसान पहुंचा रहा है।


दस्तावेजों और दलीलों के आधार पर निर्णय

मामले के दौरान प्रतिवादी की ओर से कोई भी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। नोटिस मिलने के बावजूद न तो जवाब दाखिल किया गया और न ही दलील दी गई। इस कारण अदालत ने मामले की सुनवाई एकतरफा की। उपलब्ध दस्तावेजों और दलीलों के आधार पर कोर्ट ने माना कि ट्रेडमार्क उल्लंघन और पासिंग ऑफ का मामला बनता है।


SOCIAL की यात्रा और विकास

कोर्ट ने यह भी रिकॉर्ड किया कि SOCIAL ब्रांड का उपयोग कम से कम 2014 से लगातार किया जा रहा है। इम्प्रेसारियो ने देश के विभिन्न शहरों में अपने आउटलेट खोले और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाई। कंपनी ने अपने ब्रांड नाम के लिए पंजीकरण भी प्राप्त किया है। इसके अलावा, SOCIAL की एक समर्पित वेबसाइट भी है, जो वैश्विक स्तर पर उपलब्ध है।


ब्रांड वैल्यू और अंतिम आदेश

फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि SOCIAL ने बड़े पैमाने पर कमाई और प्रचार निवेश के माध्यम से मजबूत साख बनाई है। वित्त वर्ष 2023-24 में प्रचार पर लगभग 29.93 करोड़ रुपये खर्च किए गए। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि SOCIAL अब एक प्रसिद्ध ट्रेडमार्क है। साथ ही, 'द शेक सोशल' को इस नाम या इससे मिलते-जुलते किसी भी नाम के उपयोग से स्थायी रूप से रोक दिया गया है।