Zomato और Blinkit के CEO ने डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई और सुरक्षा पर उठाए सवालों के जवाब दिए
डिलीवरी पार्टनर्स की स्थिति पर CEO का स्पष्टीकरण
नई दिल्ली: देशभर में लाल और पीली टी-शर्ट पहने डिलीवरी पार्टनर्स आजकल हमारी दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि, सोशल मीडिया और आम बातचीत में यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या 10 मिनट में डिलीवरी के चलते उनकी जान को खतरा होता है और क्या उन्हें उनकी मेहनत का उचित मुआवजा मिलता है? इन सवालों के बीच, जोमैटो और ब्लिंकिट के CEO दीपेंद्र गोयल ने खुद सामने आकर इन मुद्दों पर चर्चा की है।
दीपेंद्र गोयल के अनुसार, डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई कई प्रारंभिक ऑफिस नौकरियों से बेहतर है। 2025 में जोमैटो पार्टनर्स की प्रति घंटा औसत कमाई (EPH) 102 रुपये रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 11% अधिक है। उन्होंने बताया कि यदि कोई पार्टनर महीने में 26 दिन काम करता है और प्रतिदिन 10 घंटे काम करता है, तो उसकी कुल मासिक कमाई लगभग 26,500 रुपये हो सकती है। यदि इसमें से पेट्रोल और बाइक की रखरखाव का 20% खर्चा घटा दिया जाए, तो भी शुद्ध कमाई लगभग 21,000 रुपये होती है, जो एंट्री-लेवल जॉब्स के लिए एक सम्मानजनक राशि है।
काम के घंटे और टिप्स के बारे में भी गोयल ने कई महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह काम लचीलेपन पर आधारित है और अधिकांश लोग इसे फुल-टाइम नौकरी के रूप में नहीं, बल्कि पार्ट-टाइम के रूप में करते हैं। डेटा के अनुसार, एक पार्टनर ने साल भर में औसतन केवल 38 दिन काम किया, और केवल 2.3% लोग ऐसे थे जिन्होंने साल में 250 दिन से अधिक काम किया। टिप्स के मामले में, गोयल ने स्पष्ट किया कि टिप का 100% हिस्सा राइडर को मिलता है, लेकिन भारतीय ग्राहक इसमें थोड़े कंजूस होते हैं। ब्लिंकिट पर केवल 2.5% और जोमैटो पर 5% ऑर्डर्स में ही टिप मिलती है, जिससे राइडर की एक घंटे में टिप से औसत कमाई महज 2.6 रुपये होती है।
10 मिनट डिलीवरी और सुरक्षा के मुद्दे पर भी कंपनी ने अपना पक्ष रखा। गोयल ने बताया कि डिलीवरी का समय गाड़ी की गति से नहीं, बल्कि स्टोर की लोकेशन और लॉजिस्टिक्स से निर्धारित होता है। ब्लिंकिट पर डिलीवरी के लिए औसत दूरी केवल 2.03 किलोमीटर होती है, जिसे पूरा करने में 8 मिनट लगते हैं। इस दौरान राइडर्स की औसत गति 16 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है, जो शहर के ट्रैफिक के हिसाब से सुरक्षित है। इसके अलावा, कंपनी ने पार्टनर्स की सुरक्षा के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं, जिसमें 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा, मेडिकल कवर और डिलीवरी के दौरान चोट लगने पर कमाई के नुकसान की भरपाई जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
