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अंबाला में 'बनिया पावर क्लब' की स्थापना, समाज के उत्थान का लिया संकल्प

अंबाला में 'बनिया पावर क्लब' की स्थापना की गई है, जिसका उद्देश्य वैश्य समाज की एकता और सहयोग को बढ़ावा देना है। इस कार्यक्रम में समाज के प्रमुख व्यक्तियों ने भाग लिया और नई कार्यकारिणी का गठन किया। सुशील गोयल को संस्थापक और अतुल अग्रवाल को प्रधान नियुक्त किया गया। क्लब का लक्ष्य समाज के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास करना है। जानें इस नई पहल के बारे में और कैसे यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करेगा।
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अंबाला में 'बनिया पावर क्लब' की स्थापना, समाज के उत्थान का लिया संकल्प

अंबाला में नई सामाजिक पहल का आगाज

अंबाला समाचार: अंबाला में वैश्य समाज की एकता और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक नई सामाजिक पहल की शुरुआत की गई है। 'बनिया पावर क्लब' (Baniya Power Club) का उद्घाटन हर्षोल्लास और गरिमामयी माहौल में किया गया। इस विशेष अवसर पर समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति में क्लब की नई कार्यकारिणी का गठन भी किया गया। स्थानीय व्यापार और सामाजिक मुद्दों को सशक्त बनाने के लिए इस क्लब का गठन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


सुशील गोयल को मिला संस्थापक का पद, अतुल अग्रवाल बने प्रधान

बैठक में उपस्थित समाज के प्रमुख सदस्यों ने सर्वसम्मति से पानीपत के सुशील गोयल को क्लब का संस्थापक चुना। इसके साथ ही, क्लब की गतिविधियों को मजबूत करने के लिए अतुल अग्रवाल को प्रधान के रूप में नियुक्त किया गया। युवाओं और व्यापारियों को जोड़ने के लिए आकाश बंसल को उप प्रधान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


नई कार्यकारिणी के सदस्यों की घोषणा

बनिया पावर क्लब की पूरी टीम की सहमति से अन्य मुख्य पदों पर भी सदस्यों की नियुक्ति की गई है। रोहित गर्ग को महासचिव और स्पर्श गोयल को कोषाध्यक्ष बनाया गया है, जो संगठन के वित्तीय मामलों का ध्यान रखेंगे। इसके अलावा, समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संदीप सिंगला, विमल अग्रवाल, सचिन अग्रवाल, गौरव गर्ग और सतीश गुप्ता को कार्यकारिणी में शामिल किया गया है।


समाज के उत्थान का संकल्प, कार्यक्रम का समापन

नवनियुक्त संस्थापक सुशील गोयल और प्रधान अतुल अग्रवाल ने टीम को इस नई शुरुआत की बधाई दी। उन्होंने कहा कि 'बनिया पावर क्लब' समाज के उत्थान और सहयोग के लिए निरंतर प्रयास करेगा। इस घोषणा के बाद सभी सदस्यों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। कार्यक्रम का समापन 'बोलो अग्रसेन महाराज की जय' के जयघोष के साथ हुआ।