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अंबाला में सरसों की पैदावार में कमी से किसानों में आक्रोश

अंबाला जिले में इस वर्ष सरसों की पैदावार में कमी आई है, जिससे किसानों में भारी रोष उत्पन्न हुआ है। MSP 6200 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद, बाजार में सरसों की कीमत 5400 से 5700 रुपये के बीच है। भारतीय किसान यूनियन ने मुख्यमंत्री से तत्काल सरकारी खरीद शुरू करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि फसल की गिरावट और उचित दाम न मिलने के कारण वे आर्थिक संकट में हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है और किसानों की क्या मांगें हैं।
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अंबाला में सरसों की पैदावार में कमी से किसानों में आक्रोश

किसानों का रोष

अंबाला जिले में इस वर्ष सरसों की फसल में कमी और निजी व्यापारियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम पर खरीदारी के कारण किसानों में गहरा असंतोष है। जहां MSP 6200 रुपये प्रति क्विंटल है, वहीं बाजार में सरसों की कीमत 5400 से 5700 रुपये के बीच चल रही है। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मांग की है कि 28 मार्च की बजाय तुरंत सरकारी खरीद शुरू की जाए और नुकसान झेल चुके किसानों को भावांतर भरपाई योजना का लाभ दिया जाए।


सरसों की MSP और बाजार मूल्य

केंद्र सरकार ने इस सीजन के लिए सरसों की MSP 6200 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित की है, लेकिन अंबाला की मंडियों में किसानों को केवल 5400 से 5700 रुपये मिल रहे हैं। सरकारी खरीद 28 मार्च से शुरू होने वाली है, लेकिन किसानों ने सरकार से तत्काल खरीद की अपील की है ताकि उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके।


पैदावार में गिरावट

पैदावार में कमी का असर


इस वर्ष सरसों की खेती करने वाले किसानों को मौसम की प्रतिकूलता का सामना करना पड़ा है। अंबाला के साहा और नारायणगढ़ के किसानों ने बताया कि फसल के गिरने के कारण उत्पादन क्षमता में भारी कमी आई है। आमतौर पर इस क्षेत्र में सरसों की औसत पैदावार 8 से 10 क्विंटल प्रति एकड़ होती थी, लेकिन इस बार यह घटकर केवल 6 क्विंटल प्रति एकड़ रह गई है। अंबाला के कृषि उप निदेशक डॉ. जसविंदर सैनी ने भी इस गिरावट की पुष्टि की है, हालांकि इसके कारणों की जांच अभी जारी है।


किसानों की आर्थिक स्थिति

किसानों को घाटा


पैदावार में कमी के कारण किसान पहले से ही आर्थिक संकट में हैं और अब उन्हें मंडियों में उचित दाम नहीं मिल रहा है। मजबूरी में किसान खुले बाजार में 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा सहने को मजबूर हैं। कई किसान अपनी उपज को गोदामों में रोककर रख रहे हैं ताकि सरकारी एजेंसियों के बाजार में आने पर उन्हें पूरी MSP का लाभ मिल सके। अंबाला शहर की अनाज मंडी के व्यापारियों का कहना है कि प्रारंभ में अच्छे दाम थे, लेकिन अब बाजार सीमित दायरे में आ गया है।


किसान यूनियन की मांग

BKU चढ़ूनी की चेतावनी


किसानों के आर्थिक शोषण पर भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने कड़ा विरोध जताया है। यूनियन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से तुरंत सरकारी खरीद के आदेश जारी करने की मांग की है। भाकियू नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकारी खरीद में देरी हुई, तो मंडियों में बड़ा घोटाला हो सकता है। व्यापारी किसानों से औने-पौने दाम पर सरसों खरीदेंगे और बाद में उसी फसल को 6200 रुपये की MSP पर सरकारी एजेंसियों को बेचकर मुनाफा कमाएंगे।


सरकारी खरीद में देरी का असर

किसान यूनियन का कहना है कि जब फसल खेतों से निकल चुकी है, तो खरीद के लिए 28 मार्च का इंतजार करना अनुचित है। देरी का मतलब है कि फसल का एक बड़ा हिस्सा निजी व्यापारियों के गोदामों में चला जाएगा और असली किसान सरकारी लाभ से वंचित रह जाएगा। यूनियन ने राज्य सरकार से यह भी मांग की है कि जिन किसानों ने अब तक अपनी फसल MSP से कम दाम पर बेची है, उनके नुकसान की भरपाई तुरंत 'भावांतर भरपाई योजना' के तहत की जाए।