अजीत डोभाल ने युवाओं को स्वतंत्रता के महत्व पर किया जागरूक
भारत की स्वतंत्रता की कीमत
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने शुक्रवार को कहा कि भारत की स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ी है, जिसमें भारतीयों को पीढ़ियों तक अपमान, विनाश और हानि सहनी पड़ी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इतिहास से प्रेरणा लेकर राष्ट्र के पुनर्निर्माण में योगदान दें और एक मजबूत भारत के निर्माण की दिशा में काम करें।
विकसित भारत युवा नेता संवाद के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए डोभाल ने कहा कि स्वतंत्र भारत हमेशा इतना स्वतंत्र नहीं था जितना आज दिखाई देता है। हमारे पूर्वजों ने इसके लिए महान बलिदान दिए और घोर अपमान सहा।
इतिहास से सीखने की आवश्यकता
डोभाल ने कहा कि कई लोगों को फांसी दी गई, गांवों को जलाया गया और हमारी सभ्यता को नष्ट किया गया। उन्होंने कहा कि यह इतिहास हमें चुनौती देता है कि आज के हर युवा में स्वतंत्रता की लौ होनी चाहिए। 'प्रतिशोध' शब्द आदर्श नहीं है, लेकिन यह एक शक्तिशाली प्रेरणा हो सकती है। हमें अपने इतिहास का बदला लेना होगा और एक महान भारत का निर्माण करना होगा।
सुरक्षा खतरों की अनदेखी
डोभाल ने भारत की प्राचीन सभ्यता की उन्नति और शांति की बात की, लेकिन चेतावनी दी कि अतीत में सुरक्षा खतरों की अनदेखी ने हमें कड़े सबक सिखाए हैं। उन्होंने भावी पीढ़ियों से इन सबकों को याद रखने का आग्रह किया और विस्मृति को देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी बताया।
उन्होंने कहा कि हमारी सभ्यता अत्यंत विकसित थी और हमने कभी किसी के मंदिर नहीं तोड़े। लेकिन हमें अपनी सुरक्षा को समझने में नाकाम रहने का खामियाजा भुगतना पड़ा।
युवाओं को प्रेरित करना
डोभाल ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह भारत वैसा आजाद नहीं था जैसा आज दिखता है। हमारे पूर्वजों ने बलिदान दिया, अपमान सहा और कई लोगों को फांसी दी गई। भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी जैसे नेताओं ने संघर्ष किया।
विकसित भारत युवा नेता संवाद का यह कार्यक्रम शनिवार से शुरू होकर 12 जनवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में चलेगा।
