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अप्रैल 2026 से सैलरी स्ट्रक्चर में महत्वपूर्ण बदलाव

अप्रैल 2026 से नौकरीपेशा लोगों के लिए सैलरी स्ट्रक्चर में महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहे हैं। नए श्रम कोड के अनुसार, बेसिक सैलरी का हिस्सा बढ़ेगा, जिससे रिटायरमेंट फंड मजबूत होगा, लेकिन टेक-होम सैलरी पर असर पड़ सकता है। जानें कि ये बदलाव किस प्रकार आपके वित्तीय संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं और तैयारी के लिए क्या कदम उठाने चाहिए।
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अप्रैल 2026 से सैलरी स्ट्रक्चर में महत्वपूर्ण बदलाव

महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी


नई दिल्ली: नौकरीपेशा लोगों के लिए अप्रैल का महीना खास होने वाला है। 1 अप्रैल 2026 से नया वित्तीय वर्ष शुरू होगा, और इस दौरान सैलरी स्लिप में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेंगे। कंपनियों को अब पुराने तरीके से भत्ते बढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। नए श्रम कोड और आयकर नियमों के चलते बेसिक सैलरी का हिस्सा बढ़ना अनिवार्य है। इससे रिटायरमेंट फंड मजबूत होगा, लेकिन हाथ में आने वाली सैलरी पर असर पड़ सकता है। जो कर्मचारी कम बेसिक पर अधिक भत्ते ले रहे हैं, उन्हें इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।


बेसिक सैलरी के नए नियम

नए श्रम कोड के अनुसार, अब बेसिक सैलरी कुल CTC का कम से कम 50 प्रतिशत होनी चाहिए। पहले कई कंपनियां टैक्स बचाने के लिए बेसिक को 20-30 प्रतिशत रखकर बाकी राशि HRA, स्पेशल अलाउंस आदि में बांट देती थीं। अब भत्तों को 50 प्रतिशत से अधिक नहीं रखा जा सकेगा। यदि भत्ते अधिक होंगे, तो अतिरिक्त राशि बेसिक में जोड़ दी जाएगी।


PF और ग्रेच्युटी पर प्रभाव

बेसिक सैलरी में वृद्धि से PF और ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन भी बढ़ जाएगा। इससे आपके और कंपनी के योगदान में वृद्धि होगी, जो लंबे समय में रिटायरमेंट फंड को लाभ पहुंचाएगा। हालांकि, PF की अधिक कटौती से तुरंत टेक-होम सैलरी में कमी आ सकती है। जो कर्मचारी पहले से 50 प्रतिशत बेसिक पर हैं, उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।


टेक-होम सैलरी और HRA छूट में परिवर्तन

यदि आपकी कंपनी बेसिक सैलरी बढ़ाती है, तो HRA की टैक्स छूट भी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि HRA छूट बेसिक सैलरी के आधार पर निर्धारित होती है। पुरानी टैक्स व्यवस्था का चयन करने वालों को 80C, NPS जैसी योजनाओं का लाभ उठाना पड़ सकता है। वहीं, नए टैक्स व्यवस्था में 12.75 लाख तक की आय पर टैक्स फ्री रहेगा और स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलेगा।


किस पर पड़ेगा सबसे अधिक असर?

जिनकी सैलरी में बेसिक हिस्सा अभी बहुत कम है, उनकी कंपनी को संरचना में बदलाव करना पड़ेगा। उदाहरण के लिए, यदि 50,000 रुपये CTC में बेसिक केवल 10,000 रुपये है, तो इसे बढ़ाना होगा। इससे कुछ मामलों में टैक्स देनदारी बढ़ सकती है, लेकिन लंबे समय में भविष्य सुरक्षित होगा। कर्मचारियों को अपनी सैलरी स्लिप को ध्यान से देखना चाहिए।


तैयारी के लिए क्या करें?

अप्रैल से पहले अपनी कंपनी के HR से सैलरी संरचना के बारे में चर्चा करें। यदि बेसिक बढ़ रही है, तो टेक-होम सैलरी में संभावित बदलाव को समझ लें। सही योजना बनाकर आप अपने वित्तीय संतुलन को बनाए रख सकते हैं। समय पर समझ लेने से कोई नुकसान नहीं होगा।