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अमेरिका में भारतीय मूल के दो व्यक्तियों ने H-1B वीज़ा धोखाधड़ी स्वीकार की

अमेरिकी न्याय विभाग ने दो भारतीय मूल के व्यक्तियों, संपत राजिडी और श्रीधर माडा, द्वारा H-1B वीज़ा धोखाधड़ी की साज़िश का खुलासा किया है। इन दोनों ने झूठे दावों के आधार पर विदेशी नागरिकों को नौकरी पर रखने का वादा किया, जबकि वास्तव में कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय को उनकी आवश्यकता नहीं थी। इस धोखाधड़ी के परिणामस्वरूप, उन्हें गंभीर दंड का सामना करना पड़ सकता है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे की साज़िश के बारे में।
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अमेरिका में भारतीय मूल के दो व्यक्तियों ने H-1B वीज़ा धोखाधड़ी स्वीकार की

H-1B वीज़ा धोखाधड़ी का मामला

अमेरिकी न्याय विभाग ने जानकारी दी है कि भारतीय मूल के दो तेलुगू पुरुषों ने अमेरिका में H-1B वीज़ा धोखाधड़ी की साज़िश में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली है। कैलिफ़ोर्निया के डबलिन में रहने वाले संपत राजिडी और श्रीधर माडा, दोनों की उम्र 51 वर्ष है। इन दोनों ने विदेशी नागरिकों को नौकरी पर रखने का वादा किया और उन्हें कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय में नियुक्त करने का दावा किया, जबकि वास्तव में विश्वविद्यालय को ऐसे किसी भी कर्मचारी की आवश्यकता नहीं थी। इन दोनों को पांच साल की जेल और $250,000 का जुर्माना हो सकता है। अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेज़ों के अनुसार, संपत राजिडी दो वीज़ा-प्रोसेसिंग कंपनियों, S-Team Software Inc. और Uptrend Technologies LLC, का संचालन करते थे। इन कंपनियों के माध्यम से, राजिडी ने विभिन्न कंपनियों में अस्थायी रूप से काम करने के लिए विदेशी कर्मचारियों को लाने हेतु H-1B स्पेशलिटी ऑक्यूपेशन वर्कर वीज़ा के लिए आवेदन किया। श्रीधर माडा, कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के कृषि और प्राकृतिक संसाधन विभाग में मुख्य सूचना अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। माडा को केवल सुपरवाइज़री अधिकार प्राप्त थे और उन्हें अपने विभाग के लिए H-1B कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से सलाह लेनी होती थी।


धोखाधड़ी की साज़िश का विवरण

जून 2020 से जनवरी 2023 के बीच, इस जोड़ी ने कई लाभार्थियों के लिए धोखाधड़ी वाले H-1B वीज़ा आवेदन प्रस्तुत करने की योजना बनाई। इन आवेदनों में, राजिडी ने झूठा दावा किया कि लाभार्थियों को कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय में नियुक्त किया जाएगा। माडा ने अपने पद का उपयोग करते हुए इस झूठे दावे को और मजबूत किया कि लाभार्थियों को विश्वविद्यालय की परियोजनाओं पर काम पर रखा जाएगा। इस तेलुगू जोड़ी ने H-1B नियमों का पालन करने वाली कंपनियों के अवसरों को नुकसान पहुँचाया, क्योंकि H-1B वीज़ा का आवंटन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से होता है। राजिडी और माडा के झूठे दावों के कारण उन्हें ऐसे अप्रूवल मिले, जो अन्यथा उनके उम्मीदवारों को नहीं मिलते। इस प्रक्रिया ने वास्तव में उन प्रतिस्पर्धी कंपनियों के आवेदकों से स्थान छीन लिया, जो नियमों का पालन कर रहे थे। अदालत के दस्तावेज़ों के अनुसार, इस जोड़ी को पता था कि याचिकाओं में जिन पदों का उल्लेख किया गया था, वे वास्तव में मौजूद नहीं थे।


लाभार्थियों की स्थिति

अदालत के दस्तावेज़ों में कहा गया है कि लाभार्थियों ने कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय में किसी परियोजना पर काम नहीं किया। इसके बजाय, प्रतिवादियों ने झूठे दावों के आधार पर H-1B वीज़ा प्राप्त करने के बाद, इन लाभार्थियों को अन्य क्लाइंट्स को बेचने का कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने जानबूझकर गलत जानकारी दी, क्योंकि उन्हें पता था कि वीज़ा आवंटन के मामलों में US Citizenship and Immigration Services (USCIS) के निर्णयों के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण होती है। उनकी साज़िश के परिणामस्वरूप, राजिडी और माडा ने अन्य कंपनियों की तुलना में अनुचित लाभ प्राप्त किया और प्रतिस्पर्धी कंपनियों के लिए उपलब्ध H-1B वीज़ा के कोटे को कम कर दिया।