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अलवर के जज अमन शर्मा की आत्महत्या: एक दुखद कहानी

अलवर के 30 वर्षीय जज अमन शर्मा की आत्महत्या ने सभी को चौंका दिया है। एक प्रतिभाशाली न्यायाधीश और जिम्मेदार पिता का जीवन किस तरह से अंधकार में खो गया, यह जानने के लिए पढ़ें। उनके परिवार में तनाव और व्यक्तिगत समस्याओं के कारण यह दुखद घटना हुई। अमन के अंतिम कॉल ने उनके पिता को गहरे सदमे में डाल दिया। जानें इस मामले की पूरी कहानी और परिवार की न्याय की मांग।
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अलवर के जज अमन शर्मा की आत्महत्या: एक दुखद कहानी

अलवर में जज अमन शर्मा की दुखद मृत्यु


अलवर: अलवर के निवासी और दिल्ली में कार्यरत 30 वर्षीय जज अमन शर्मा की आत्महत्या की खबर ने सभी को चौंका दिया है। एक प्रतिभाशाली छात्र, सफल न्यायाधीश और जिम्मेदार पिता का जीवन किस तरह से अंधकार में खो गया, यह सवाल आज न्यायपालिका और आम जनता के मन में है। अमन के इस कदम ने प्रतिष्ठित वकील प्रेम प्रकाश शर्मा के खुशहाल परिवार को बर्बाद कर दिया है, जबकि उनके छोटे भाई पहले से ही एक सड़क दुर्घटना के बाद मानसिक अवसाद से जूझ रहे हैं।


अमन शर्मा का परिवार और उनकी शिक्षा

अमन शर्मा, अलवर के प्रसिद्ध वकील प्रेम प्रकाश शर्मा के बड़े बेटे थे। शांत और मेधावी स्वभाव के अमन ने अपनी मेहनत से 2021 में न्यायिक सेवा में सफलता प्राप्त की। उनके पिता चाहते थे कि अमन की शादी उनके मित्र की बेटी से हो, लेकिन अमन को अपनी बैचमेट से प्यार हो गया। पिता ने अपनी इच्छा को त्यागते हुए बेटे की खुशी को प्राथमिकता दी और दोनों का विवाह धूमधाम से हुआ।


वैवाहिक जीवन में समस्याएं

शादी के कुछ समय बाद अमन की निजी जिंदगी में मतभेद बढ़ने लगे। पति-पत्नी के बीच अक्सर झगड़े होने लगे। परिवार का आरोप है कि अमन की साली, जो जम्मू में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, ने तनाव को बढ़ाने में भूमिका निभाई। अमन अक्सर अलवर आते थे, लेकिन उन्होंने कभी अपनी समस्याओं का जिक्र नहीं किया। वह अपनी पीड़ा को मुस्कुराहट के पीछे छिपाने में माहिर थे, जिसका किसी को अंदाजा नहीं था।


अमन का अंतिम फोन कॉल

मौत से दो दिन पहले अमन ने अपने पिता को फोन किया और कहा, 'पापा, यह मेरा आखिरी कॉल है, अब मुझसे जिया नहीं जा रहा।' बेटे की आवाज में छिपा दर्द सुनकर प्रेम प्रकाश शर्मा उसी रात दिल्ली के लिए निकल पड़े। उन्हें उम्मीद थी कि वह वहां पहुंचकर अपने बेटे को इस मानसिक संकट से बाहर निकाल सकेंगे।


परिवार में तनाव और आत्महत्या

दिल्ली पहुंचने पर पिता ने माहौल को अत्यंत तनावपूर्ण पाया। आरोप है कि अमन की पत्नी ने उनके पिता का अपमान किया, जो एक होनहार बेटे के लिए असहनीय था। परिजनों का कहना है कि इसी अपमान ने अमन को तोड़ दिया। दो मई की दोपहर, कमरे से आ रही चीख-पुकार के बीच, अमन ने अपने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।


अंतिम विदाई

रविवार की सुबह जब अमन का शव अलवर पहुंचा, तो माहौल गमगीन हो गया। राजकीय सम्मान के साथ भारी जनसमूह की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। पिता ने भारी मन से अपने बेटे को मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में ससुराल पक्ष का कोई सदस्य नहीं आया। अब अमन के परिवार वाले इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।