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आरबीआई-एमपीसी बैठक: ब्याज दरों में स्थिरता की संभावना

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (आरबीआई-एमपीसी) की बैठक 3 जून से शुरू होने जा रही है। इस बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण महंगाई और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। जानें इस बैठक में क्या निर्णय लिए जा सकते हैं और आरबीआई की चुनौतियाँ क्या हैं।
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आरबीआई-एमपीसी बैठक: ब्याज दरों में स्थिरता की संभावना

आरबीआई गवर्नर ने ब्याज दरों को स्थिर रखने के संकेत दिए


आरबीआई-एमपीसी बैठक की तैयारी


बिजनेस डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते, आरबीआई की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति पर है। यह स्थिति भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (आरबीआई-एमपीसी) की बैठक पर भी प्रभाव डालेगी, जो तीन जून से शुरू होगी। इस बैठक में, आरबीआई महंगाई और आर्थिक प्रभावों को कम करने के उपायों पर चर्चा करेगा। इसके साथ ही, यह भी उम्मीद की जा रही है कि आरबीआई मौजूदा रेपो रेट को अपरिवर्तित रख सकता है, जिसका अर्थ है कि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा।


आरबीआई की सतर्कता

विश्लेषकों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जून की एमपीसी बैठक में केंद्रीय बैंक सतर्कता बनाए रखेगा। वह पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों, कमोडिटी की कीमतों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और वित्तीय बाजारों पर उनके प्रभावों पर ध्यान देगा, और उसके बाद ही कोई नीतिगत निर्णय लेगा।


बैठक के निर्णयों की घोषणा

तीन दिवसीय एमपीसी बैठक के निर्णयों की घोषणा आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा 5 जून को की जाएगी। पिछले महीने की बैठक में भी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था, जिसका कारण भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न अनिश्चितताएं थीं।


आरबीआई की चुनौतियाँ

हालांकि ब्याज दरों में स्थिरता की संभावना अधिक है, कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक अपने आर्थिक अनुमानों में संशोधन कर सकता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बाहरी कारकों के कारण रुपए पर दबाव, आरबीआई को मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान को बढ़ाने और जीडीपी वृद्धि के अनुमानों में कटौती करने के लिए मजबूर कर सकते हैं। एसबीआई रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्थिर वैश्विक परिदृश्य के बीच केंद्रीय बैंक मौजूदा नीतिगत दर को बनाए रखेगा।