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इंडिया हैबिटेट सेंटर: एक अनकही कहानी

इंडिया हैबिटेट सेंटर, जो 60 अरब रुपये की कीमत वाली भूमि पर स्थित है, आवास, पर्यावरण और शहरी नियोजन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इसकी स्थापना 1988 में राजीव गांधी द्वारा की गई थी, और यह विभिन्न संस्थानों का समन्वित कार्यस्थल है। हालाँकि, पिछले एक दशक में यहाँ कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय सेमिनार नहीं हुआ है, और इसकी पहचान अब खान-पान की सुविधाओं से अधिक हो गई है। जानें इस केंद्र की कहानी और इसके पीछे की सोच के बारे में।
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इंडिया हैबिटेट सेंटर: एक अनकही कहानी

इंडिया हैबिटेट सेंटर का परिचय


इंडिया हैबिटेट सेंटर, जो लगभग 60 अरब रुपये की कीमत वाली 9.5 एकड़ भूमि पर स्थित है, आवास, पर्यावरण और शहरी नियोजन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ 'द ऑल अमेरिकन डिनर', 'ओरिएंट एक्सप्रेस', 'द डाइन डेन', 'दिल्ली ओ दिल्ली', 'मेड' जैसे कई प्रसिद्ध रेस्टोरेंट हैं, जो विभिन्न प्रकार के व्यंजन पेश करते हैं। इसके अलावा, यहाँ स्पा, स्टीम रूम, जिम और रूफटॉप स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।


इंडिया हैबिटेट सेंटर की स्थापना का निर्णय 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा लिया गया था। उनका उद्देश्य था कि यह केंद्र केवल सरकारी अधिकारियों के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरणविदों, लेखकों, कलाकारों और आम नागरिकों के लिए भी एक समन्वित कार्यस्थल बने। 1993 में, जब पी. वी. नरसिंहराव प्रधानमंत्री थे, यह केंद्र तैयार हुआ।


राजीव गांधी की दृष्टि के अनुसार, इस केंद्र में कई प्रमुख संस्थानों को कार्यालय स्थान दिया गया, जैसे कि आवास एवं शहरी विकास निगम (हुडको), राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) और संयुक्त राष्ट्र की मानव बस्तियों से जुड़ी वैश्विक संस्था। इसके बाद, डॉ. मनमोहन सिंह ने भी इस केंद्र के विकास में रुचि दिखाई।


हालांकि, पिछले एक दशक में यहाँ कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय सेमिनार आयोजित नहीं हुआ है। पहले 'वर्ल्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट' यहाँ होता था, लेकिन अब इसे ताज पैलेस होटल में स्थानांतरित कर दिया गया है। क्या यह नहीं सोचना चाहिए कि आईएचसी की पहचान अब उसके खान-पान की सुविधाओं से अधिक हो गई है?


क्या यह उचित नहीं होगा कि आईएचसी की कला दीर्घा में होने वाली प्रदर्शनियों, नाटकों, संगीत कार्यक्रमों और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों की समीक्षा की जाए? क्या यहाँ के जिम और स्विमिंग पूल का उपयोग केवल कुछ विशेष लोगों द्वारा किया जा रहा है?


आईएचसी का मुख्य उद्देश्य अपने सदस्यों को स्पा, स्टीम रूम, जिम और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएँ प्रदान करना है। इसके अलावा, यहाँ के कमरों और सुइट्स की दरें भी काफी सस्ती हैं। क्या इन सुविधाओं का उपयोग सही तरीके से हो रहा है? क्या इनकी सालाना समीक्षा की जाती है?


आईएचसी का अध्यक्ष आवास और शहरी विकास मंत्रालय का सचिव होता है। वर्तमान में, गुजरात काडर के एक आईएएस अधिकारी इस पद पर हैं। आईएचसी के निदेशक की नियुक्ति गवर्निंग काउंसिल द्वारा की जाती है। वर्तमान निदेशक के. जी. सुरेश हैं, जो पहले पत्रकार रह चुके हैं।


इस प्रकार, इंडिया हैबिटेट सेंटर की कहानी केवल एक संस्थान की नहीं, बल्कि देश की राजधानी में सरकारी भूमि पर बने कई क्लबों की भी है। ये क्लब विभिन्न प्रकार की सुविधाएँ प्रदान करते हैं और यहाँ कई लोग लाभान्वित होते हैं।