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इंदौर में जल संकट: दूषित पानी से फैल रही बीमारियाँ

इंदौर, जो मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी और देश का सबसे साफ शहर माना जाता है, इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण उल्टी और दस्त की बीमारी फैल गई है, जिससे कई लोगों की जान जा चुकी है। स्थानीय निवासी नल के पानी पर विश्वास खो चुके हैं और महंगा बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं। प्रशासन ने इस समस्या के समाधान के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया है और कई राजनीतिक कदम उठाए गए हैं। जानें इस संकट की पूरी कहानी।
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इंदौर में जल संकट: दूषित पानी से फैल रही बीमारियाँ

इंदौर में जल संकट की गंभीरता


इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी और देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर में इस समय गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल के कारण उल्टी और दस्त की बीमारी फैल गई है, जिससे स्थानीय निवासियों में भय और अविश्वास उत्पन्न हो गया है। नगर निगम की जल आपूर्ति से लोग मुंह मोड़ रहे हैं और मजबूरी में महंगे बोतलबंद पानी का सहारा ले रहे हैं।


दूषित पानी से स्वास्थ्य पर प्रभाव

भगीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण उल्टी और दस्त की बीमारी तेजी से फैल रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों और कुछ जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मृतकों की संख्या 10 से 16 के बीच हो सकती है। इस क्षेत्र में अधिकांश निवासी निम्न और मध्यम आय वर्ग से हैं।


नल के पानी पर विश्वास का संकट

स्थानीय निवासी सुनीता का कहना है कि अब वे नल का पानी पीने से डरते हैं। उनके परिवार को रोजाना 20 से 30 रुपये खर्च करके पानी के जार खरीदने पड़ते हैं। उनका आरोप है कि पिछले दो-तीन वर्षों से नलों में गंदा पानी आ रहा था, लेकिन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरी में लोग पानी को उबालकर और फिटकरी डालकर पीने को मजबूर हैं।


बोतलबंद पानी का उपयोग

शहर में अविश्वास इतना बढ़ गया है कि चाय विक्रेता भी ग्राहकों को भरोसा दिलाने के लिए बोतलबंद पानी का उपयोग कर रहे हैं। चाय विक्रेता तुषार वर्मा बताते हैं कि वे पानी खरीदकर चाय बना रहे हैं, लेकिन ग्राहकों पर बोझ न पड़े इसलिए चाय के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। साफ-सफाई के लिए प्रसिद्ध इस शहर की यह स्थिति लोगों को चौंका रही है।


प्रशासन की पहल

जिला प्रशासन ने इस समस्या के समाधान के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया है। गैर सरकारी संगठनों के कार्यकर्ता लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे पानी को 15 मिनट तक उबालें और फिलहाल टैंकर से मिलने वाला पानी ही पीएं। इसके साथ ही नगर निगम की पाइपलाइनों और ट्यूबवेल्स में क्लोरीनेशन किया जा रहा है ताकि बैक्टीरिया और वायरस को समाप्त किया जा सके।


राजनीतिक कदम

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम आयुक्त का तबादला और दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित करने के आदेश दिए हैं। सरकार ने उच्च न्यायालय को सूचित किया है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और हर पल निगरानी की जा रही है। इंदौर की जल आपूर्ति नर्मदा नदी से होती है, जो लगभग 80 किलोमीटर दूर से पाइपलाइन के माध्यम से लाई जाती है और एक दिन छोड़कर दी जाती है।