ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़राइल का युद्ध: जनता की राय और आर्थिक प्रभाव
युद्ध की स्थिति और जनता की प्रतिक्रिया
नई दिल्ली। अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है, जो अब 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष ने मध्य पूर्व में व्यापक तबाही मचाई है। दोनों देश लगातार ईरान पर हमले कर रहे हैं, जबकि ईरान भी जवाबी कार्रवाई में पीछे नहीं हट रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्धविराम के लिए कोई संकेत नहीं दे रहे हैं और ईरान पर विजय प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस युद्ध में झुकने वाला नहीं है।
इस युद्ध पर अमेरिका के मीडिया चैनलों द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में यह सामने आया है कि 66 प्रतिशत अमेरिकी नागरिक युद्ध के खिलाफ हैं, जबकि 34 प्रतिशत का मानना है कि यह युद्ध आवश्यक था। युद्ध के चलते पेट्रोल और गैस की कीमतों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे ट्रंप प्रशासन के प्रति जनता की नाराजगी बढ़ रही है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कमी उत्पन्न हो गई है। एक ओर जहां ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सेना की कार्रवाई में अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं। जनता का मानना है कि इस युद्ध के कारण अमेरिका की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है, और महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है।
