ईरान के लिए कश्मीर से चंदा: भारत में ही खर्च होगा पैसा
कश्मीर के निवासियों ने ईरान के लिए धन जुटाया, जिसमें नकद और आभूषण शामिल थे। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान इस धन का उपयोग केवल भारत में दवाइयों की खरीदारी के लिए कर सकेगा। यह जानकारी कई लोगों को चौंका सकती है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि चंदा भारत में ही खर्च होगा। जानें इस चंदे के पीछे की कहानी और ईरान की आलोचना के बारे में।
| Apr 6, 2026, 13:35 IST
कश्मीर से ईरान के लिए चंदा
कश्मीर के निवासियों ने ईरान के लिए धन जुटाने में काफी योगदान दिया था, जिसमें नकद, चांदी, पीतल के बर्तन और सोने के आभूषण शामिल थे। भारत में ईरान के दूतावास ने इस चंदे के लिए क्यूआर कोड भी जारी किया था। लेकिन अब यह जानकर आप चौंक जाएंगे कि ईरान इस धन का उपयोग केवल एक चीज खरीदने के लिए कर सकता है, और वह भी सिर्फ भारत से। यह जानकारी कई लोगों को चौंका सकती है। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर काफी चर्चा हुई थी कि कश्मीरी लोग इतना धन क्यों और कैसे जुटा रहे हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि दान में दी गई वस्तुओं में से कुछ ऐसी हैं जो पहले कश्मीरी हिंदुओं के पास थीं। संभवतः ये वही बर्तन और कलाकृतियाँ हैं जिन्हें कश्मीरी हिंदू छोड़ गए थे। लेकिन अब मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान को प्राप्त चंदा अपने देश में नहीं ले जाया जा सकेगा।
ईरान को चंदे का उपयोग
कई लोगों ने सवाल उठाया था कि अचानक इतना धन कैसे इकट्ठा हुआ। क्या इसका गलत इस्तेमाल होगा? इस संदर्भ में खबर आई है कि ईरान के दूतावास को जो भी धन मिला है, उसे भारत में ही खर्च करना होगा। ईरान को जो सोना, आभूषण और बर्तन मिले हैं, उन्हें भी भारत में ही जमा करना होगा। भारत के लिए यह फायदेमंद होगा क्योंकि इससे यह पता चल सकेगा कि कितना धन इकट्ठा हुआ और उसका उपयोग कैसे किया गया। सूत्रों के अनुसार, जब यह धन ईरान की भलाई के लिए इकट्ठा किया गया था, तो इसे उसी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
दवाइयों की खरीदारी
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान को जो भी नकद और ऑनलाइन धन मिला है, उसका उपयोग केवल दवाइयों की खरीदारी के लिए किया जा सकता है, और ये दवाइयाँ भी भारत से ही खरीदी जानी होंगी। इसका मतलब है कि भारत का धन भारत में ही खर्च होगा। सूत्रों के मुताबिक, ऐसा कोई राजनयिक प्रक्रिया नहीं है जिसके तहत ईरान का दूतावास नकद और सोना ईरान भेज सके। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों से जो सोना और आभूषण ईरान के लिए इकट्ठा किए गए थे, उन्हें भी स्थानीय बैंक में जमा करना होगा। इन्हें जमा करने के बाद ही ईरान को इस पर धन प्राप्त होगा।
ईरान की आलोचना
इस चंदे के कारण ईरान को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था। पाकिस्तान के दबाव में, ईरान ने चंदे के लिए किए गए सभी 'थैंक्यू इंडिया' वाले ट्वीट डिलीट कर दिए थे और इसके बाद 'थैंक्यू कश्मीर' लिखकर ट्वीट किए। इससे यह स्पष्ट होता है कि ईरान ने भारतीय समर्थन को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की थी। इसी कारण से इस चंदे पर संदेह बढ़ गया। आपको बता दें कि वियना कन्वेंशन, जो राजनयिक संबंधों और प्रोटोकॉल को निर्धारित करता है, विदेशी दूतावासों द्वारा धन जुटाने के विषय को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं करता है। हालांकि, यह दूतावासों को बैंकिंग अधिकार प्रदान करता है।
