ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन: आर्थिक संकट और सरकार के खिलाफ जनाक्रोश
ईरान में हालात की गंभीरता
ईरान इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। देश गंभीर आर्थिक संकट में है, जिससे जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। लगातार छठे दिन, ईरान के विभिन्न शहरों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। यह आंदोलन महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन अब यह सीधे सरकार और इस्लामिक शासन के खिलाफ हो गया है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि तेहरान से लेकर इसहान, सिराज, यजद और किरमान शाह तक तनाव फैल चुका है। कुछ क्षेत्रों में हिंसक झड़पों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है।
अमेरिका की चेतावनी
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप ने एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि यदि ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हमला करता है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका पूरी तरह से तैयार है और जरूरत पड़ने पर प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा होगा। यह चेतावनी उस समय आई है जब ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामिनई के तख्ता पलट की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरानी खुफिया एजेंसियों का कहना है कि पश्चिमी देश इन प्रदर्शनों का उपयोग इस्लामिक शासन को गिराने के लिए कर रहे हैं। ट्रंप के बयानों के बाद ईरान की प्रतिक्रिया आक्रामक रही है। ईरान ने कहा है कि उसकी सुरक्षा रेड लाइन है। ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने कहा कि अमेरिका और इस्राइल प्रदर्शन भड़का रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका आक्रामक कार्रवाई करता है, तो क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों को वैध लक्ष्य माना जाएगा।
महंगाई और आर्थिक संकट
ईरान में लोग सड़कों पर क्यों उतरे? असल वजह महंगाई और आर्थिक संकट है। ईरान में महंगाई दर 42% से अधिक हो चुकी है। खाद्य वस्तुएं पिछले साल की तुलना में लगभग 72% महंगी हो गई हैं। चिकित्सा और दवाओं की लागत भी लगभग 50% बढ़ गई है। इसके अलावा, ईरानी मुद्रा की स्थिति भी खराब हो चुकी है, 1 डॉलर की कीमत अब लगभग 14 लाख रियाल हो गई है। इसका मतलब है कि लोगों की आमदनी वही है, लेकिन खर्च कई गुना बढ़ गया है। दुकानदारों ने घाटे के डर से सामान बेचना बंद कर दिया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
ईरान की नागरिक सरकार, जिसका नेतृत्व राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन कर रहे हैं, ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की इच्छा जताई है। उन्होंने सरकारी टेलीविजन पर कहा, "अगर हम लोगों की आजीविका का मुद्दा हल नहीं करते हैं, तो हम नरक में जाएंगे।" हालांकि, पेज़ेश्कियन ने स्वीकार किया कि उनके पास विकल्प सीमित हैं क्योंकि रियाल की कीमत में भारी गिरावट आई है।
