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उत्तर भारत में ठंड का कहर: राहत की कोई उम्मीद नहीं

उत्तर भारत में ठंड ने अपने चरम पर पहुंचकर लोगों को घरों में कैद कर दिया है। पहाड़ों में बर्फबारी के कारण मैदानी इलाकों में तापमान में गिरावट आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम का फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जानें इस ठंड के कारण और इसके प्रभाव के बारे में विस्तार से।
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उत्तर भारत में ठंड का कहर: राहत की कोई उम्मीद नहीं

बर्फबारी से बढ़ी ठंड


पहाड़ों में बर्फबारी का असर


नए साल की शुरुआत के साथ ही ठंड ने अपने चरम पर पहुंचना शुरू कर दिया है। उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में कोहरे और ठंडी हवाओं के कारण ठंड में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे लोग घरों में रहने को मजबूर हो रहे हैं। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में भी देखने को मिल रहा है। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू-मनाली और लाहौल की चोटियों पर बर्फबारी हुई है।


तापमान में गिरावट

ताबो में तापमान माइनस 6.8 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। कश्मीर में गुलमर्ग में तापमान माइनस 6.5 डिग्री दर्ज किया गया। उत्तराखंड में केदारनाथ और आसपास के क्षेत्रों में बर्फ की चादर बिछ चुकी है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में भी ठंड बढ़ गई है। हरियाणा के महेंद्रगढ़ में तापमान 4 डिग्री तक गिर गया, जबकि पंजाब के फरीदकोट में यह 5.5 डिग्री रहा। उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में घना कोहरा छाया हुआ है, जहां दृश्यता 50 मीटर से भी कम है। दिल्ली में रविवार को घने कोहरे के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।


शीतलहर का प्रभाव

सात जनवरी तक शीतलहर जारी


उत्तर भारत में अगले सात दिनों तक रात और सुबह के समय घना कोहरा रहने की संभावना है। उत्तराखंड और राजस्थान में 4 और 5 जनवरी को घना कोहरा रहेगा। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में शीतलहर की स्थिति बनी रहेगी।


पश्चिमी विक्षोभ का असर


आईएमडी के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के कारण उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। घना कोहरा और शीतलहर फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है।


फसलों पर प्रभाव

कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव


मौसम की इस तीव्रता का सीधा असर सब्जी उत्पादकों और रबी फसलों पर पड़ने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और व्यावहारिक खेती प्रबंधन के लिए सलाह दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह का मौसम सब्जियों और कोमल पौधों के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है।


आईसीएआर और राज्य कृषि विभागों के विशेषज्ञों के अनुसार, आलू, टमाटर, मटर, गोभी, फूलगोभी और हरी पत्तेदार सब्जियां ठंड और पाले के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। पाला पड़ने की आशंका वाले क्षेत्रों में रात के समय हल्की सिंचाई करने की सलाह दी गई है, क्योंकि गीली मिट्टी तापमान में गिरावट के प्रभाव को कम करती है।