एमपी हाई कोर्ट का भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर महत्वपूर्ण निर्णय
भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर कोर्ट का निर्णय
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने धार स्थित भोजशाला मंदिर और कमाल मौला मस्जिद के विवाद पर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि विवादित संरचना की धार्मिक पहचान वाग्देवी सरस्वती मंदिर से जुड़ी हुई है। इसके साथ ही, न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की पीठ ने मुस्लिम पक्ष द्वारा प्रस्तुत कमाल मौला मस्जिद के दावे को अस्वीकार कर दिया है। इस निर्णय पर एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी है, जिन्होंने इसे बाबरी मस्जिद के मामले से जोड़ा है।
ओवैसी की प्रतिक्रिया
असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस गलती को सुधारने के लिए कदम उठाएगा और इस आदेश को रद्द करेगा।' उन्होंने इस निर्णय को बाबरी मस्जिद के निर्णय से जोड़ते हुए कहा कि दोनों मामलों में स्पष्ट समानताएं हैं।
We hope the Supreme Court will set this right and overturn this order.
Glaring similarities with the Babri Masjid judgment . https://t.co/3sEUpe0KlK
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) May 15, 2026
कोर्ट का विस्तृत निर्णय
उच्च न्यायालय ने इस मामले में कहा कि भोजशाला परिसर और कमाल मौला मस्जिद एक संरक्षित स्मारक हैं। न्यायालय ने यह भी बताया कि इस स्थान पर हिंदुओं की पूजा-अर्चना सदियों से बिना किसी रुकावट के जारी है। न्यायालय के अनुसार, ऐतिहासिक दस्तावेज इस स्थल को संस्कृत अध्ययन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बताते हैं, जबकि पुरातात्विक साक्ष्य देवी सरस्वती को समर्पित एक मंदिर के अस्तित्व की ओर इशारा करते हैं। पीठ ने यह भी कहा कि देवी की पवित्रता की रक्षा करना और इस स्थान पर कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक संवैधानिक दायित्व है।
ASI के आदेश को रद्द किया गया
एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2003 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें हिंदुओं के पूजा के अधिकारों को सीमित किया गया था और मुसलमानों को कुछ विशेष अवसरों पर इस स्थान पर नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुरातात्विक साक्ष्यों और कानूनी दस्तावेजों के हजारों पन्नों की समीक्षा की। ASI की 2,000 से अधिक पन्नों की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट ने संकेत दिया कि इस स्थान पर मस्जिद के निर्माण से पहले एक बड़ा ढांचा मौजूद था और पुराने मंदिर के कुछ हिस्सों का उपयोग वर्तमान इमारत में भी किया गया था।
