ओडिशा के पूर्व प्रधान सचिव वीके पांडियन के खिलाफ जांच शुरू
वीके पांडियन की मुश्किलें बढ़ीं
ओडिशा के सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में से एक, वीके पांडियन, जिनका कार्यकाल लगभग दो दशकों तक रहा, अब मुश्किलों में हैं। उनके खिलाफ पद के दुरुपयोग के आरोपों की जांच प्रारंभ हो चुकी है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि वे दिल्ली में भाजपा के उच्च पदस्थ नेताओं के संपर्क में हैं, जिससे उन्हें कोई समस्या नहीं होगी। लेकिन यह सब पर्दे के पीछे की बातें हैं।
ओडिशा पुलिस की अपराध शाखा ने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के प्रधान सचिव रहे वीके पांडियन के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। यह जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और इसे डीएसपी स्तर के अधिकारियों द्वारा संचालित किया जा रहा है, लेकिन इसके दायरे में आगे बढ़ने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार, इस जांच में पद के दुरुपयोग के साथ-साथ सरकारी संसाधनों के अनुचित उपयोग की भी जांच की जा रही है। एक आरोप यह है कि पांडियन बिना अनुमति के हेलीकॉप्टर से अकेले उड़ान भरते रहे। चूंकि वे मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव थे, इसलिए वे मुख्यमंत्री के साथ हेलीकॉप्टर में उड़ सकते थे, लेकिन बिना अनुमति अकेले उड़ान भरने का उन्हें अधिकार नहीं था। बताया जा रहा है कि उनके अकेले हेलीकॉप्टर उड़ाने में 17 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। इसके अलावा, उन पर कई अन्य आरोप भी लगाए गए हैं।
वीके पांडियन, जो तमिलनाडु के निवासी हैं, 2000 बैच के ओडिशा कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले ली है। उनकी पत्नी, सुजाता कार्तिकेयन, जो खुद एक आईएएस अधिकारी थीं, ने भी वीआरएस लिया है। यह ध्यान देने योग्य है कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा ने पांडियन के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, जो नवीन पटनायक की हार में एक महत्वपूर्ण कारक रहा।
