किसानों का धरना: 270वें दिन भी जारी
किसानों की उपेक्षा सरकार को भारी पड़ेगी
किसान आंदोलन का 270वां दिन (बाढड़ा)। कृषि क्षेत्र में लगातार प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों की स्थिति बेहद खराब हो गई है। वे कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं, जिसके लिए सरकार को तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है। किसानों के हितों की रक्षा के नाम पर सरकार केवल दिखावा कर रही है। 2023 के रबी और खरीफ सीजन की फसलों के बीमा मुआवजे की जांच और भरपाई के लिए किसान किसी भी संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे।
किसान अपने हकों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे
किसान सभा के पूर्व अध्यक्ष रघबीर श्योराण काकड़ौली ने अनाज मंडी के सामने आयोजित धरने को संबोधित करते हुए कहा कि विधानसभा बजट सत्र में किसानों के बकाया मुआवजे जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा न होना अन्नदाता का अपमान है। उन्होंने कहा कि किसान अपने हकों के लिए कितने भी लंबे संघर्ष से जूझने को तैयार हैं और सरकार को झुकने पर मजबूर कर देंगे।
उन्होंने आगे कहा कि किसानों के अधिकारों और बाढड़ा के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसानों को खाद, बीज और फसल बिक्री के लिए धरना देना पड़ रहा है, जबकि व्यापारियों के करोड़ों रुपये के जुर्माने को एक कलम से माफ कर दिया जाता है।
बकाया मुआवजे के लिए धरना जारी
किसान पिछले 262 दिनों से बकाया मुआवजे के लिए धरना दे रहे हैं। मौजूदा सरकार कृषि व्यवस्था को कमजोर कर रही है और कारपोरेट घरानों को बढ़ावा दे रही है, जो हमारी पीढ़ी के लिए उचित नहीं है। किसान को डीएपी और यूरिया के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, जबकि करोड़ों रुपये जमा करने के बावजूद उनके ट्यूबवेल का कनेक्शन नहीं मिल रहा है।
धरने में नरेश कादयान, रघबीर श्योराण, किसान नेता राजकुमार हड़ौदी, और अन्य कई किसान नेता शामिल हुए।
