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केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कला प्रदर्शनी ‘अभिव्यंजना’ में दी नई दिशा

दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी में आयोजित कला प्रदर्शनी ‘अभिव्यंजना’ का पांचवां दिन केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की उपस्थिति से खास बना। उन्होंने छात्रों को पुरस्कार दिए और कला के महत्व पर जोर दिया। जानें इस कार्यक्रम में क्या हुआ और मंत्री ने क्या सुझाव दिए।
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केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कला प्रदर्शनी ‘अभिव्यंजना’ में दी नई दिशा

अभिव्यंजना कला प्रदर्शनी का विशेष दिन

रोहतक: दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा) में आयोजित कला प्रदर्शनी ‘अभिव्यंजना’ का पांचवां दिन विशेष रूप से यादगार रहा। केंद्रीय ऊर्जा, आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने इस प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसमें राज्यसभा सांसद संजय भाटिया और पूर्व मंत्री मनीष ग्रोवर भी उपस्थित रहे। मनोहर लाल ने इस अवसर पर फैकेल्टी ऑफ विजुअल आर्ट्स के छात्रों को पुरस्कार वितरित किए और यूनिवर्सिटी की कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। कुलगुरु डॉ. अमित आर्य और रजिस्ट्रार डॉ. गुंजन मलिक ने उनका स्वागत किया।


कला प्रदर्शनी का अवलोकन

केंद्रीय मंत्री का स्वागत पारंपरिक तिलक के साथ किया गया। इसके बाद, उन्होंने फैकेल्टी ऑफ डिजाइन में कला प्रदर्शनी का अवलोकन किया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें छात्रों ने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से उनका स्वागत किया। मनोहर लाल ने प्रदर्शनी में विभिन्न कलाकृतियों का अवलोकन किया और छात्रों से उनके काम के बारे में जानकारी ली। उन्होंने खुद भी कैनवस पर रंग भरकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में छात्रों द्वारा बनाए गए सेल्फी प्वाइंट पर तस्वीरें भी खींची गईं।


छात्रों को सम्मानित किया गया

केंद्रीय मंत्री ने एफटीवी विभाग के मिनी ऑडिटोरियम में छात्र सम्मान समारोह में भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ और यूनिवर्सिटी के कुलगीत से हुई। कुलगुरु ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह और छात्रों द्वारा बनाए गए पोर्ट्रेट भेंट किए। इस अवसर पर छात्रों ने ‘रास रंग’ की प्रस्तुति दी, जिसमें नाट्य विधा के गीत शामिल थे। 19 छात्रों को ‘बेस्ट आर्ट वर्क अवॉर्ड’ और 30 विद्यार्थियों को प्रशंसा पदक दिए गए।


कला और संस्कृति का महत्व

मनोहर लाल ने कहा कि कला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र निर्माण का माध्यम भी है। उन्होंने ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन आर्ट’ थीम पर कार्य करने का सुझाव दिया, ताकि हर जिले की पारंपरिक कला को पहचान मिल सके। उन्होंने लोक कलाओं को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि इस प्रदर्शनी को अन्य स्थानों पर भी ले जाना चाहिए।


संजय भाटिया का संबोधन

राज्यसभा सांसद संजय भाटिया ने कहा कि कला व्यक्ति को सकारात्मक दिशा देती है और स्ट्रेस मैनेजमेंट में मदद करती है। उन्होंने यूनिवर्सिटी को कला उपकरणों के लिए 11 लाख रुपये देने की घोषणा की।