कॉकरोच जनता पार्टी की कानूनी लड़ाई: अभिजीत दीपके ने हाई कोर्ट में दायर की याचिका
कॉकरोच जनता पार्टी की मुश्किलें बढ़ीं
कॉकरोच जनता पार्टी दिल्ली हाई कोर्ट : सोशल मीडिया पर अपने व्यंग्यात्मक कंटेंट के लिए चर्चित डिजिटल प्लेटफॉर्म 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) को अब गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर उनके ट्विटर अकाउंट को ब्लॉक कर दिया है, जिसके बाद इस मंच के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। दीपके ने सरकार के इस कदम को कानूनी चुनौती दी है।
धमकी भरे संदेश के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई
इस विवाद के बीच, अभिजीत दीपके को सोशल मीडिया पर एक गंभीर धमकी भरा संदेश प्राप्त हुआ था। संदेश में कहा गया था, 'अकाउंट डिलीट करके यह सब बंद कर दो, वरना तुम अमेरिका में हो तब भी तुम्हारे माता-पिता भारत में हैं।' इस धमकी के बाद पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है, खासकर महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में दीपके के माता-पिता के घर के आसपास।
सुप्रीम कोर्ट ने भावुकता पर लगाई रोक
इस मामले के बीच, सोमवार को उच्चतम न्यायालय में फर्जी वकीलों और कॉकरोच जनता पार्टी से संबंधित गतिविधियों की जांच के लिए एक जनहित याचिका दायर की गई। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि इस मुद्दे को इतना भावुक नहीं बनाना चाहिए।
अदालती बयानों के दुरुपयोग का आरोप
सुनवाई के दौरान, एक अन्य वकील ने कानून की फर्जी डिग्रियों के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच की मांग की। याचिका में आरोप लगाया गया कि अदालती कार्यवाही के दौरान न्यायाधीशों द्वारा दिए गए बयानों का कुछ लोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'ऐसी कोई गंभीर आवश्यकता फिलहाल नहीं दिखती, हम इसे देखेंगे।'
कॉकरोच और परजीवी शब्दों का विवाद
यह विवाद 15 मई को शुरू हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट में वकीलों के वरिष्ठ पदनाम से जुड़ी याचिका पर सुनवाई चल रही थी। उस समय प्रधान न्यायाधीश ने 'कॉकरोच' और 'परजीवी' जैसे शब्दों का उपयोग किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम का पेज तेजी से वायरल हो गया।
इस विवाद को देखते हुए 16 मई को प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां सामान्य युवाओं के खिलाफ नहीं थीं, बल्कि उन लोगों के लिए थीं जो फर्जी डिग्रियों के सहारे वकालत में प्रवेश कर रहे हैं।
