जनवरी में मिर्च की खेती के लिए विशेषज्ञों की सलाह
मिर्च और सब्जियों की खेती का सही समय
हिसार। जनवरी का महीना मिर्च और अगेती सब्जियों की खेती के लिए उपयुक्त है। एचएयू ने एनपी 46 ए किस्म और लो टनल तकनीक का उपयोग करने की सिफारिश की है ताकि अधिक पैदावार प्राप्त की जा सके।
कड़ाके की ठंड का यह मौसम किसानों के लिए केवल आराम करने का नहीं, बल्कि आगामी सीजन की तैयारी का भी है। जनवरी और फरवरी का समय सब्जी उत्पादकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय 'अगेती खेती' के लिए सबसे उपयुक्त है। यदि किसान सही रणनीति अपनाते हैं, तो वे गर्मियों की शुरुआत में अपनी फसल बाजार में बेचकर अच्छा लाभ कमा सकते हैं।
ठंड में कौन सी फसलें लगाएं
प्रगतिशील किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय दो प्रकार की फसलों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। पहली वह सब्जियां जो ठंड में उगती हैं, जैसे पालक, मेथी, गाजर, मूली, मटर, गोभी और ब्रोकली।
दूसरी महत्वपूर्ण फसलें वे हैं जो गर्मियों में आती हैं, लेकिन उनकी तैयारी अभी करनी होती है। इनमें भिंडी, लौकी, करेला, ककड़ी, टमाटर और बैंगन शामिल हैं। इनकी नर्सरी फरवरी के अंत या मार्च में खेत में रोपाई के लिए तैयार की जा सकती है।
मिर्च की खेती के लिए एचएयू की सलाह
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) के कुलपति प्रोफेसर बीआर काम्बोज ने मिर्च की खेती करने वाले किसानों को विशेष सुझाव दिए हैं। उन्होंने बताया कि बसंतकालीन मिर्च की फसल के लिए खेत की तैयारी जल्द शुरू कर देनी चाहिए। जनवरी के अंत तक मिर्च की रोपाई करना सबसे उचित रहता है।
किस्मों का चयन
अच्छी पैदावार के लिए बीज का सही चयन आवश्यक है। विश्वविद्यालय ने किसानों को निम्नलिखित किस्में अपनाने की सलाह दी है:
सामान्य मिर्च: इसके लिए 'एनपी 46 ए' या 'पंत सी 1' किस्म सबसे उपयुक्त मानी गई है। एक एकड़ खेत के लिए लगभग 400 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
शिमला मिर्च: यदि आप शिमला मिर्च लगाना चाहते हैं, तो 'कैलिफोर्निया वंडर' किस्म का उपयोग करें। इसके लिए भी प्रति एकड़ 400 ग्राम बीज पर्याप्त होगा।
खेत की तैयारी और रोपाई का तरीका
मिर्च की अधिक पैदावार के लिए खेत की मिट्टी का उपजाऊ होना आवश्यक है। रोपाई से लगभग तीन हफ्ते पहले खेत में 10 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद मिलानी चाहिए। खेत में जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें और समतल कर लें।
इसके बाद खेत में क्यारियां बना लें। दूरी का ध्यान रखें: रोपाई करते समय कतारों के बीच 60 सेंटीमीटर की दूरी रखें। पौधे से पौधे की दूरी 45 सेंटीमीटर होनी चाहिए। ध्यान दें कि शिमला मिर्च के पौधे सामान्य मिर्च की तुलना में अधिक फैलते हैं, इसलिए दूरी का विशेष ध्यान रखें।
पाले से बचाने के लिए लो टनल तकनीक
जनवरी की ठंड और पाला नन्हें पौधों के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इससे बचने के लिए 'लो टनल' तकनीक का उपयोग करना चाहिए। इसमें पौधों को प्लास्टिक की पारदर्शी चादर से ढका जाता है, जिससे अंदर का तापमान गर्म रहता है। यह एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और फसल को समय से पहले तैयार करने में मदद करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
FAQ’s
प्रश्न: जनवरी में मिर्च की कौन सी किस्म लगानी चाहिए?
उत्तर: जनवरी में बसंतकालीन फसल के लिए एनपी 46 ए और पंत सी 1 किस्म सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
प्रश्न: एक एकड़ में मिर्च के कितने बीज की आवश्यकता होती है?
उत्तर: एक एकड़ खेत में मिर्च की खेती के लिए लगभग 400 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है।
प्रश्न: पौधों को पाले से बचाने के लिए क्या करें?
उत्तर: ठंड और पाले से बचाने के लिए लो टनल तकनीक का प्रयोग करें और बीजों को बीजामृत से उपचारित करें।
प्रश्न: मिर्च की रोपाई में पौधों की दूरी कितनी होनी चाहिए?
उत्तर: कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 45 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।
बीजामृत और आधुनिक तकनीक का उपयोग
विशेषज्ञों की सलाह है कि बीजों को बोने से पहले उन्हें 'बीजामृत' से उपचारित करना चाहिए ताकि रोगों से बचाव हो सके। इसके अलावा, खेत में 8 से 10 क्विंटल घनजीवामृत और नीम की खली का उपयोग करने से मिट्टी की सेहत में सुधार होता है। पानी की बचत और खरपतवार रोकने के लिए 'ड्रिप इरिगेशन' (टपक सिंचाई) और 'मल्चिंग पेपर' का उपयोग करना आज के समय की सबसे समझदारी भरी खेती है।
