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जेएनयू में विवादित नारों के खिलाफ प्रदर्शन, कांग्रेस ने की निंदा

जेएनयू में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने के विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह के खिलाफ विवादित नारे लगाए गए। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने इस नारेबाजी की निंदा की, यह कहते हुए कि विरोध का अधिकार है, लेकिन भाषा का चयन महत्वपूर्ण है। जानें इस घटना के बारे में और क्या कहा गया।
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जेएनयू में विवादित नारों के खिलाफ प्रदर्शन, कांग्रेस ने की निंदा

जेएनयू में प्रदर्शन और विवादित नारे

जेएनयू में विवादित नारों का प्रदर्शन: 2020 के दिल्ली दंगों के संदर्भ में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने के विरोध में जेएनयू में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान खालिद और इमाम के समर्थकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए। कांग्रेस के नेता संदीप दीक्षित ने इस प्रकार की नारेबाजी की आलोचना की है।

सोमवार की रात, दिल्ली स्थित जेएनयू के साबरमती हॉस्टल के बाहर भारी हंगामा देखने को मिला। जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) और वामपंथी संगठनों ने प्रशासन और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। परिसर में 'न्याय दो' और 'रिहाई दो' के नारे गूंजते रहे। इस बीच, एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया, जिसमें प्रदर्शनकारियों को विवादित नारे लगाते हुए सुना जा सकता है। वीडियो में 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर' जैसे नारे लगाए जा रहे हैं।

कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने जेएनयू में पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ लगाए गए नारों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "किसी को भी कोर्ट के फैसले के खिलाफ विरोध करने का अधिकार है। लेकिन 'कब्र' जैसे शब्दों का उपयोग करना उचित नहीं है। ये छात्र हैं, उन्हें विरोध करने का अधिकार है। अगर उन्हें लगता है कि जिन दो व्यक्तियों को जमानत नहीं मिली, उन्हें मिलनी चाहिए, तो यह एक सामान्य विचार है। लेकिन इस तरह की भाषा का प्रयोग आपत्तिजनक है। कांग्रेस हमेशा इस बात पर जोर देती है कि सार्वजनिक संवाद में हमें अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए। आप लोगों की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन इसे व्यक्त करने का एक उचित तरीका होना चाहिए।"