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झारखंड में मिला 227 किलोग्राम का अमेरिकी बम, सेना की मदद से होगा निष्क्रिय

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में एक विशाल अमेरिकी बम की खोज ने क्षेत्र में दहशत फैला दी है। यह बम, जो द्वितीय विश्व युद्ध का हो सकता है, सुवर्णरेखा नदी के किनारे दबा हुआ था। प्रशासन ने इसे निष्क्रिय करने के लिए सेना की मदद मांगी है। जानें इस खतरनाक बम के बारे में और प्रशासन की तैयारी के बारे में।
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झारखंड में मिला 227 किलोग्राम का अमेरिकी बम, सेना की मदद से होगा निष्क्रिय

पूर्वी सिंहभूम में खतरनाक बम की खोज

पूर्वी सिंहभूम: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में एक विशाल अमेरिकी बम की खोज ने क्षेत्र में दहशत फैला दी है। यह बम, जो गैस सिलेंडर के आकार का है, सुवर्णरेखा नदी के किनारे बालू और मिट्टी के नीचे दबा हुआ था। बम निरोधक दस्ते ने इसे देखकर अपनी असमर्थता व्यक्त की है। बम पर 'AN-M64' मॉडल और 'मेड इन अमेरिका' लिखा हुआ है, और इसका वजन लगभग 500 पाउंड (लगभग 227 किलोग्राम) है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह द्वितीय विश्व युद्ध का हो सकता है।


बम की खोज का विवरण

यह खतरनाक बम तब सामने आया जब एक मजदूर ने रेत के अवैध खनन के दौरान अपने फावड़े से इसे टकराया। जब आसपास की मिट्टी हटाई गई, तो मजदूरों के होश उड़ गए। स्थानीय लोगों का मानना है कि हाल की भारी बारिश के कारण यह बम बहकर यहां आया होगा। इस घटना के बाद, बहरागोड़ा थाना प्रभारी शंकर प्रसाद कुशवाहा के नेतृत्व में पुलिस और प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया है और ग्रामीणों को बम के आसपास जाने से रोका गया है।


बम का खौफनाक इतिहास

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह बम दशकों पुराना हो सकता है। माना जा रहा है कि यह उस समय का है जब महुलडांगरी क्षेत्र में एक फाइटर प्लेन दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। बम नदी की नरम मिट्टी में धंस गया था, जिसके कारण यह वर्षों तक 'स्लीपिंग मॉन्स्टर' की तरह दबा रहा।


डिफ्यूज करने की तैयारी

इस भारी विस्फोटक को संभालना बेहद खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह बम गलती से फट गया, तो इसके आसपास के क्षेत्र में भारी तबाही हो सकती है। प्रशासन ने बम को निष्क्रिय करने के लिए रांची से विशेष टीम को बुलाने की योजना बनाई है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा एयरबेस से भी मदद मांगी गई है।