डॉ. अब्दुल मजीद: भारत मानवता और नैतिक मूल्यों का प्रतीक
भारत की शांति की नीति की सराहना
कहा, भारत आने वाले लोग अपनी इच्छा से आते हैं उनपर कोई दबाव नहीं होता
डॉ. अब्दुल मजीद (लखनऊ): अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच, भारत का रुख एक बार फिर से वैश्विक समर्थन प्राप्त कर रहा है। भारत ने इस युद्ध में शामिल सभी पक्षों से शांति और संवाद के माध्यम से स्थिति को सामान्य करने का आह्वान किया है। ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने भारत की प्रशंसा करते हुए कहा कि लोग अपनी इच्छा से भारत आते हैं, उन पर कोई दबाव नहीं होता।
उन्होंने भारत को निष्ठा, मानवता और नैतिक मूल्यों का प्रतीक बताया और कहा कि वे यहां आकर बहुत खुश हैं। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि खामेनेई उन लोगों की आवाज हैं, जिनकी अपनी कोई आवाज नहीं है।
अमेरिका के साथ टकराव और वार्ता की संभावना
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिकी जनता को संदेश देते हुए कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच टकराव और वार्ता दोनों ही संभव हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका के किसी भी आक्रमण का ईरान गर्व और दृढ़ता से सामना करेगा। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा, 'आज विश्व एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। टकराव का रास्ता अब पहले से कहीं अधिक महंगा और व्यर्थ है।' उन्होंने कहा कि टकराव और वार्ता के बीच चयन वास्तविक और निर्णायक है, और इसका परिणाम आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देगा।
ईरान का गौरवशाली इतिहास
उन्होंने ईरान के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि सदियों से ईरान ने कई आक्रांताओं का सामना किया है। उनका इतिहास में केवल दागी नाम रह गया, जबकि ईरान आज भी दृढ़, सम्मानित और गर्वित है। पेजेशकियन ने पिछले सप्ताह ट्रंप द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उन्होंने इस्राइल पर आरोप लगाया कि उसने अमेरिका को ईरान के खिलाफ युद्ध में धकेला। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह सच नहीं है कि अमेरिका इस आक्रमण में इस्राइल का प्रतिनिधि बनकर शामिल हुआ?
