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तिरुवनंतपुरम अस्पताल में सर्जरी के बाद गाइड वायर छोड़ने का मामला

तिरुवनंतपुरम के जनरल हॉस्पिटल में एक मरीज की सर्जरी के बाद गाइड वायर छोड़ने की घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। सुमैया नाम की महिला की सर्जरी के बाद यह वायर उसकी छाती में रह गया, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने अपनी गलती स्वीकार की है, लेकिन परिवार का आरोप है कि यह जानबूझकर छिपाया गया। सुमैया ने न्याय और बेहतर इलाज की मांग की है। इस मामले की जांच चल रही है।
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तिरुवनंतपुरम अस्पताल में सर्जरी के बाद गाइड वायर छोड़ने का मामला

डॉक्टरों की लापरवाही से मरीज की जिंदगी खतरे में

तिरुवनंतपुरम- तिरुवनंतपुरम के जनरल हॉस्पिटल से एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। केरल की सुमैया की जिंदगी उस समय बदल गई जब उसकी सर्जरी के बाद उसकी छाती में एक गाइड वायर, जो दवा देने के लिए सेंट्रल लाइन के साथ डाला गया था, छोड़ दिया गया। यह वायर बाद में हटाया नहीं गया।


यह मामला तब उजागर हुआ जब सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई, जिसमें डॉक्टर ने अपनी गलती स्वीकार की। डॉक्टर ने सुमैया के रिश्तेदार से बातचीत में कहा, "यह सच में एक गलती थी।" उन्होंने बताया कि यह गड़बड़ी एक्स-रे के बाद सामने आई और असली जिम्मेदारी उन लोगों की थी जिन्होंने ट्यूब डाली थी। हालांकि, सुमैया के परिवार का आरोप है कि डॉक्टर को पहले से पता था कि गाइड वायर अंदर रह गया है, लेकिन उन्होंने इसे छिपाया।


सुमैया, जो कट्टक्कड़ा की निवासी हैं, ने 22 मार्च 2023 को तिरुवनंतपुरम जनरल हॉस्पिटल में थायरॉइड की सर्जरी करवाई थी। सर्जरी के बाद नसें खोजने में कठिनाई होने पर डॉक्टरों ने दवा और खून चढ़ाने के लिए सेंट्रल लाइन डाली, जिसमें गाइड वायर का उपयोग किया गया, लेकिन वह अंदर ही रह गया।


जब सुमैया की तबीयत बिगड़ने लगी, तो उसे श्री चित्रा इंस्टीट्यूट ले जाया गया। वहां की जांच में पता चला कि उसकी छाती में वही गाइड वायर फंसा हुआ है। अब यह वायर खून की नसों से चिपक चुका है और डॉक्टरों ने कहा है कि इसे ऑपरेशन के जरिए निकालना संभव नहीं है। इस स्थिति के कारण सुमैया को इस लापरवाही के गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ रहा है।


सुमैया की तबीयत लगातार बिगड़ रही है, और उसने स्वास्थ्य विभाग से मदद मांगी है। उसने विपक्ष के नेता से भी मुलाकात की है, यह कहते हुए कि उसे इस घटना के कारण शारीरिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है, इसलिए उसे न्याय और बेहतर इलाज की आवश्यकता है। जैसे-जैसे मामला मीडिया में आया, जिला चिकित्सा अधिकारी (डीएमओ) ने अस्पताल प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मामले की जांच चल रही है।


यह पहली बार नहीं है जब ऐसा मामला सामने आया है। 2017 में कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में भी एक महिला के पेट में ऑपरेशन के बाद कैंची छूट गई थी, जिससे उसे कई सालों तक दर्द सहना पड़ा।