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दवाओं की कीमतों में वृद्धि: आम आदमी पर असर

1 अप्रैल 2026 से देशभर में दवाओं की कीमतों में वृद्धि हो गई है, जिसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। 900 से अधिक आवश्यक दवाओं की कीमतें 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। इस लेख में जानें कि किन दवाओं की कीमतें बढ़ी हैं, इसके पीछे के कारण और मरीजों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
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दवाओं की कीमतों में वृद्धि: आम आदमी पर असर

दवाओं की कीमतों में वृद्धि

नई दिल्ली: आज, 1 अप्रैल 2026 से, देशभर में दवाओं की कीमतों में वृद्धि हो गई है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) के निर्देशों के अनुसार, 900 से अधिक आवश्यक दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य में संशोधन किया गया है। इस वृद्धि का प्रभाव उन दवाओं पर पड़ेगा, जिनका रोजाना उपयोग किया जाता है। बुखार, दर्द, संक्रमण, एनीमिया, विटामिन सप्लीमेंट, लिवर, किडनी, शुगर और ब्लडप्रेशर की दवाएं अब 10 से 12 प्रतिशत तक महंगी हो गई हैं।


महंगाई का प्रभाव

आज से थोक और रिटेल बाजार में नई दरें लागू हो गई हैं। अधिकांश दवा दुकानों पर 80 प्रतिशत नया स्टॉक आ चुका है, जिसमें नई एमआरपी छपी हुई है। पुराना स्टॉक कम कीमत पर उपलब्ध है, लेकिन यह जल्द ही समाप्त हो जाएगा। मरीजों और उनके तीमारदारों को अब हर महीने दवाओं पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।


कौन सी दवाएं महंगी हुईं

पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएं, विटामिन-मिनरल सप्लीमेंट, एनीमिया की दवाएं, शुगर, ब्लडप्रेशर, लिवर और पेट संबंधी दवाएं, साथ ही त्वचा रोग की कई दवाएं इस वृद्धि में शामिल हैं। कई कंपनियों ने जनवरी से ही नए बैच पर महंगी दरें लागू कर दी थीं।


दवाओं की कीमतों में वृद्धि का कारण

फार्मा कंपनियां हर साल अप्रैल में नियमित रूप से कीमतों में संशोधन करती हैं। इस बार जीएसटी कटौती के बावजूद 10 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। थोक विक्रेताओं का कहना है कि यह वृद्धि युद्ध या बाहरी कारणों से नहीं, बल्कि एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। कई कंपनियों ने फरवरी-मार्च में ही नए स्टॉक भेजना शुरू कर दिया था।


नए स्टॉक पर नई दरें

अब बाजार में 80 प्रतिशत दवाएं नई एमआरपी के साथ उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए, 80 रुपये वाली दवा अब 90-95 रुपये और 100 रुपये वाली दवा 110-115 रुपये हो गई है। थोक विक्रेता भी नए स्टॉक के अनुसार ही बिक्री कर रहे हैं। अप्रैल के पहले सप्ताह में और कंपनियों का नया स्टॉक आ जाएगा।


मरीजों के लिए सलाह

दवा खरीदते समय पुराने और नए स्टॉक की एमआरपी की जांच अवश्य करें। जहां तक संभव हो, थोड़ी मात्रा में ही दवा खरीदें ताकि महंगे स्टॉक का बोझ कम हो सके। डॉक्टर से सस्ते विकल्प पूछने की भी सलाह दी जाती है। हालांकि, आवश्यक दवाओं के मामले में कीमत बढ़ने का कोई विकल्प नहीं है।