दिल्ली पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य को गिरफ्तार किया
लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य की गिरफ्तारी
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिल्ली सीमा से लश्कर-ए-तैयबा के एक सक्रिय सदस्य को पकड़ा है। आरोपी, शबीर अहमद लोन, कांगन श्रीनगर का निवासी है और हाल ही में बांग्लादेश में रह रहा था। वह एक स्लीपर सेल नेटवर्क का हिस्सा था और देश विरोधी गतिविधियों में संलग्न था। अधिकारियों का कहना है कि वह भारत विरोधी पोस्टर लगाने में शामिल था, और यह मॉड्यूल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के निर्देश पर काम कर रहा था.
मेट्रो पोस्टर विवाद
यह मामला आठ फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर सीआईएसएफ की शिकायत के बाद शुरू हुआ। दिल्ली के विभिन्न मेट्रो स्टेशनों पर भड़काऊ और पाकिस्तान समर्थक पोस्टर चिपकाए गए थे, जिनमें आतंकवादी बुरहान वानी की तस्वीरें भी शामिल थीं। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और डीपीडीपी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई। स्पेशल सेल ने गहन जांच शुरू की, जिसमें जमीन पर खुफिया जानकारी और तकनीकी निगरानी का सहारा लिया गया।
लश्कर मॉड्यूल का खुलासा
जांच के दौरान कई राज्यों में फैले लश्कर-ए-तैयबा के संगठित मॉड्यूल का पता चला। फरवरी में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में छापेमारी की गई, जिसमें आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें अधिकांश बांग्लादेशी नागरिक थे। ये लोग फर्जी आधार कार्ड और पहचान दस्तावेजों के माध्यम से भारत में रह रहे थे। छापों में मोबाइल फोन, फर्जी आईडी, बैंक कार्ड और पाकिस्तान समर्थक पोस्टर बरामद हुए।
शबीर लोन की भूमिका
शबीर अहमद लोन इस मॉड्यूल का मुख्य हैंडलर था, जो बांग्लादेश से संचालित हो रहा था। वह युवाओं को कट्टर बनाने, पोस्टर अभियान चलाने और संवेदनशील स्थानों की निगरानी करने के लिए निर्देश देता था। लोन ने अवैध घुसपैठियों को भर्ती कर उन्हें प्रचार, जासूसी और संभावित आतंकी योजनाओं में शामिल किया। पुलिस के अनुसार, वह लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख नेताओं हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी के संपर्क में था।
आतंकवाद का पुराना रिकॉर्ड
शबीर लोन का आतंकवाद से गहरा नाता है। वर्ष 2007 में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने उसे हथियार और विस्फोटक मामले में गिरफ्तार किया था, जब उसके पास एके-47 राइफल और ग्रेनेड बरामद हुए थे। सजा पूरी होने के बाद वह बांग्लादेश भाग गया और लश्कर नेटवर्क को फिर से स्थापित करने लगा। जांचकर्ताओं का मानना है कि इस मॉड्यूल को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी का पूरा समर्थन प्राप्त था। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बड़े खतरे को टाल दिया है।
