दिल्ली में CJP का विरोध प्रदर्शन: अनुमति की प्रक्रिया में उलझन
CJP की अनुमति की प्रक्रिया में दिक्कतें
6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले विरोध प्रदर्शन से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रक्रिया संबंधी समस्याओं का सामना कर रही है। सीजेपी ने अब तक इस प्रदर्शन के लिए पुलिस से अनुमति प्राप्त करने के लिए आवेदन नहीं किया है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने नीट विवाद के संदर्भ में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए इस विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी। मौजूदा नियमों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन के लिए आमतौर पर सात दिन पहले आवेदन करना आवश्यक होता है। हालांकि, सीजेपी का कहना है कि वे 6 जून को ही अनुमति के लिए आवेदन करेंगे।
सीजेपी की रणनीति पर स्पष्टीकरण
जब सीजेपी से पूछा गया कि उन्होंने अब तक आवेदन क्यों नहीं किया, तो प्रवक्ता विजेता दहिया ने बताया कि यह संगठन की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'लोगों की भावनाएं इस विरोध प्रदर्शन को समर्थन दे रही हैं और वर्तमान में वे अभिजीत दिपके के साथ जुड़े हुए हैं, इसलिए हमने निर्णय लिया कि अभिजीत दिपके 6 जून को खुद पुलिस से अनुमति लेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी को उम्मीद है कि प्रशासन उन्हें शांतिपूर्वक प्रदर्शन की अनुमति देगा।
सोशल मीडिया पर CJP का बढ़ता समर्थन
सीजेपी को सोशल मीडिया पर जबरदस्त समर्थन मिल रहा है, और इंस्टाग्राम पर पार्टी के 22 मिलियन फॉलोअर्स हो चुके हैं। दिपके ने घोषणा की है कि वह शनिवार को अमेरिका से लौटेंगे और इस प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। अपने समर्थकों को एक वीडियो संदेश में दिपके ने कहा, 'मुझसे एयरपोर्ट पर मिलें।'
पुलिस की अनुमति का महत्व
संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत लोगों को शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन का अधिकार है। फिर भी, आयोजकों को उस पुलिस स्टेशन से अनापत्ति प्रमाण पत्र या अनुमति प्राप्त करना आवश्यक होता है, जिसके अधिकार क्षेत्र में प्रदर्शन किया जाना है। यह प्रशासन को विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, और स्थानीय लोगों के हितों के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है। यदि अनुमति नहीं दी जाती है, तो प्रशासन को इसका कारण बताना होता है।
