दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति: एक्यूआई 304 के पार
दिल्ली में प्रदूषण का संकट जारी
एक्यूआई लगातार तीन सौ के पार, अभी नहीं है सुधार के आसार
दिल्ली में प्रदूषण की समस्या लगातार बनी हुई है। बारिश की कमी और धुंध के कारण हवा में हानिकारक तत्वों की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है, जिससे लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है। यह स्थिति पिछले तीन महीनों से बनी हुई है। अक्टूबर के अंत में शुरू हुआ वायु संकट अब भी जारी है। दिल्ली के एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के अनुसार, बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 304 दर्ज किया गया, जो 'बेहद खराब' श्रेणी में आता है।
दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में एक्यूआई
दिल्ली के विभिन्न स्थानों पर एक्यूआई की स्थिति पर नजर डालें तो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, अलीपुर में 284, आनंद विहार में 351, अशोक विहार में 319, आया नगर में 244, बवाना में 191, बुराड़ी में 273, और चांदनी चौक में 347 एक्यूआई दर्ज किया गया है। इसके अलावा, डीटीयू क्षेत्र में 303, द्वारका सेक्टर-8 में 334, आईजीआई एयरपोर्ट टी3 में 242, आईटीओ में 296, जहांगीरपुरी में 346, लोधी रोड में 255, मुंडका में 334, नजफगढ़ में 281, नरेला में 298, पंजाबी बाग में 327, आरकेपुरम में 341, रोहिणी में 323, सोनिया विहार में 320, विवेक विहार में 335, और वजीरपुर में 327 एक्यूआई दर्ज किया गया।
भविष्यवाणी और स्वास्थ्य पर प्रभाव
सीपीसीबी का अनुमान है कि शुक्रवार तक हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में बनी रहेगी। इससे सांस के मरीजों को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है, और लोगों को आंखों में जलन, खांसी और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
वायु गुणवत्ता के चिंताजनक आंकड़े
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दिल्ली का वार्षिक औसत एक्यूआई 201 रहा। यह चिंताजनक है कि पूरे वर्ष एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब हवा की गुणवत्ता अच्छी श्रेणी में रही हो। इस दौरान 79 दिन संतोषजनक, 121 दिन मध्यम, 86 दिन खराब, 71 दिन बहुत खराब और आठ दिन गंभीर श्रेणी में दर्ज किए गए। 2024 की तुलना में, 2025 में संतोषजनक दिनों की संख्या थोड़ी बढ़ी (66 से 79), जबकि गंभीर श्रेणी के दिनों की संख्या कम हुई (17 से 8)। हालांकि, बहुत खराब दिनों की संख्या लगभग समान रही। रिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में एक्यूआई में मामूली सुधार का मुख्य कारण जून और जुलाई के दौरान बेहतर वायु गुणवत्ता रही।
