दिल्ली सरकार ने ह्यूमन रेबीज को नोटिफायबल डिजीज घोषित किया
रेबीज के संदिग्ध और कंफर्म केस की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य
दिल्ली सरकार ने ह्यूमन रेबीज को नोटिफायबल डिजीज के रूप में मान्यता दी है। इसका मतलब है कि यदि कोई संदिग्ध या पुष्टि किया गया मामला सामने आता है, तो इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देना आवश्यक होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से रेबीज के मामलों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी और मरीजों का समय पर इलाज किया जा सकेगा। अब सभी सरकारी और निजी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सकों को ऐसे मामलों की तुरंत रिपोर्ट करनी होगी।
दिल्ली सरकार का स्टेट एक्शन प्लान
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि रेबीज से होने वाली किसी भी मौत को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह निर्णय समय पर उपचार और निगरानी में सहायता करेगा। यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। रेबीज एक गंभीर बीमारी है, लेकिन यदि समय पर इलाज किया जाए तो इसे रोका जा सकता है। दिल्ली सरकार कुत्तों के काटने से होने वाली रेबीज मौतों को रोकने के लिए एक स्टेट एक्शन प्लान भी तैयार कर रही है।
रेबीज से हुई मौतों का आंकड़ा
दिल्ली नगर निगम के अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 49 रेबीज के मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 35,198 मामले कुत्तों के काटने के हैं। केंद्रीय सरकार ने संसद में बताया था कि 2022 से 2024 के बीच दिल्ली में रेबीज से कोई मौत नहीं हुई, लेकिन आरटीआई के जवाब में यह जानकारी सामने आई कि इस अवधि में लगभग 18 लोगों की मौतें हुई हैं।
भारत में रेबीज से होने वाली मौतें
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल दुनिया भर में लगभग 59,000 लोग रेबीज के कारण मरते हैं। भारत में हर साल 20,000 लोगों की जान जाती है। रिपोर्ट किए गए मामलों में से 60% मौतें 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की होती हैं, क्योंकि बच्चों के काटने के मामले अक्सर दर्ज नहीं किए जाते।
रेबीज क्या है?
रेबीज एक वायरल संक्रमण है, जो आमतौर पर कुत्तों, बिल्लियों और बंदरों के काटने से फैलता है। यह संक्रमित जानवर के काटने, खरोंचने या उसकी लार के संपर्क में आने से इंसानों में फैल सकता है। रेबीज वायरस मानव मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। यदि समय पर इलाज नहीं किया गया, तो व्यक्ति कोमा में जा सकता है या उसकी मृत्यु हो सकती है।
