दुनिया के सबसे नास्तिक देशों की सूची: क्या है इसके पीछे का कारण?

नास्तिकता का बढ़ता चलन
Atheist countries list: विश्व में करोड़ों लोग ऐसे हैं, जो खुद को नास्तिक मानते हैं। ये न तो ईश्वर को मानते हैं, न अल्लाह को, और न ही किसी अन्य देवी-देवता या धार्मिक विचारधारा में विश्वास रखते हैं। इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, और इन देशों में धार्मिक पहचान की जगह तर्क, विज्ञान और मानवता की सोच को प्राथमिकता दी जा रही है।
एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 190 करोड़ लोग अब किसी भी धर्म से खुद को नहीं जोड़ते। वर्ष 2010 में यह संख्या 160 करोड़ के आसपास थी, लेकिन पिछले 15 वर्षों में यह आंकड़ा बढ़ता गया है। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से विकसित और शिक्षित देशों में देखी जा रही है। आइए जानते हैं उन 10 प्रमुख देशों के बारे में, जहां नास्तिकों की संख्या सबसे अधिक है।
चीन – सबसे अधिक नास्तिक आबादी वाला देश
भारत के पड़ोसी देश चीन में नास्तिकों की सबसे बड़ी संख्या है। वर्ल्ड पॉपुलेशन सर्वे 2023 के अनुसार, यहां के 91% लोग किसी भी धर्म को नहीं मानते। ये लोग देवी-देवताओं या धार्मिक अनुष्ठानों में विश्वास नहीं रखते। हालांकि, भगवान बुद्ध को आदर्श मानते हैं, लेकिन पूजा नहीं करते। यहां तक कि 61% लोग ईश्वर के अस्तित्व को नकारते हैं।
जापान – परंपरा के बावजूद धर्म से दूरी
जापान में 86% लोग खुद को नास्तिक मानते हैं। यहां की संस्कृति में धार्मिक परंपराएं शामिल हैं, जैसे शिंतो धर्म, लेकिन इसके अनुयायी भी किसी दिव्य शक्ति में विश्वास नहीं करते। यहां धर्म को सामाजिक रीति-रिवाजों और त्योहारों तक सीमित माना जाता है।
स्वीडन – सेक्युलर सोच का प्रभाव
स्वीडन में 78% लोग किसी भी धर्म में आस्था नहीं रखते। यहां सैक्युलरिज्म तेजी से बढ़ा है, और केवल 8% लोग ही किसी धर्म से जुड़े हुए हैं। यहां के लोग मानते हैं कि धर्म का समाज में कोई विशेष योगदान नहीं है।
नॉर्थ कोरिया – आधिकारिक रूप से नास्तिक राज्य
उत्तर कोरिया को आधिकारिक तौर पर नास्तिक राष्ट्र माना जाता है। यहां की 73% आबादी किसी भी धर्म को नहीं मानती। हालांकि, कुछ लोग शमनवाद, चोंडोवाद, बौद्ध धर्म और ईसाई धर्म से जुड़े हुए हैं, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम है।
चेक गणराज्य – यूरोप का नास्तिक राष्ट्र
चेक गणराज्य में धर्म से मोहभंग की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। यहां के 73% लोगों ने ईसाई धर्म त्याग दिया है। केवल 12% लोग ही धार्मिक स्थलों पर जाते हैं। युवाओं में विशेष रूप से नास्तिकता का रुझान देखने को मिलता है।
वियतनाम – परंपरा और तर्क का मेल
वियतनाम में 68% लोग किसी भी धार्मिक आस्था से जुड़े नहीं हैं। यहां बौद्ध धर्म का ऐतिहासिक प्रभाव रहा है, लेकिन अब नई पीढ़ी में तर्क और वैज्ञानिक सोच को प्राथमिकता दी जा रही है।
नीदरलैंड – खुली सोच का देश
नीदरलैंड में 51% आबादी किसी भी धार्मिक विश्वास को नहीं मानती। यहां शिक्षा और स्वतंत्र विचारधारा के चलते धर्म से दूरी बनाना आम हो गया है। समाज में धर्म की भूमिका तेजी से कम होती जा रही है।
फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, उरुग्वे और यूनाइटेड किंगडम – धर्म से अलग पहचान
इन देशों में भी बड़ी संख्या में लोग खुद को अग्नोस्टिक या एथीस्ट मानते हैं। यहां की जनता धर्म की बजाय मानवीय मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्राथमिकता देती है।
अमेरिका – नास्तिकता में तेजी
अमेरिका जैसे धार्मिक देश में भी नास्तिकों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। यहां 10.09 करोड़ लोग किसी भी धर्म को नहीं मानते। खासकर युवाओं में यह प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।
जर्मनी, रूस और ब्राजील – धर्म से मोहभंग
जर्मनी में 3.02 करोड़, रूस में 2.96 करोड़ और ब्राजील में 2.81 करोड़ लोग किसी भी धार्मिक आस्था से दूर हैं। इन देशों में धार्मिक संस्थाओं से लोगों का विश्वास धीरे-धीरे उठता जा रहा है।
नास्तिक क्यों बन रहे हैं लोग?
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक कट्टरता के प्रति आक्रोश के चलते लोग धर्म से दूर हो रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि "धर्म समाज में नफरत और विभाजन फैलाता है", इसलिए वे ईश्वर या किसी धर्म में आस्था रखने से इनकार कर रहे हैं।