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धीरेंद्र शास्त्री को विदेशों से चंदा लेने की मिली अनुमति

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, बागेश्वर धाम के प्रमुख कथावाचक, को अब विदेशों से चंदा प्राप्त करने की आधिकारिक अनुमति मिल गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनके संगठन को एफसीआरए के तहत पंजीकरण दिया है, जिससे वे विश्वभर से दान स्वीकार कर सकेंगे। हालांकि, इस निर्णय पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं, खासकर तब जब कई एनजीओ के पंजीकरण रद्द किए गए हैं। जानें इस मामले में और क्या है, और क्यों यह निर्णय विवादों में है।
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धीरेंद्र शास्त्री को विदेशों से चंदा लेने की मिली अनुमति

धीरेंद्र शास्त्री को मिली एफसीआरए पंजीकरण की मंजूरी

बागेश्वर धाम के प्रमुख कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को अब विदेशों से चंदा प्राप्त करने की आधिकारिक अनुमति मिल गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनके संगठन 'श्री बागेश्वर जन सेवा समिति गढ़ा' को एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के तहत पंजीकरण प्रदान किया है। यह पंजीकरण 'धार्मिक (हिंदू)' श्रेणी में किया गया है। 29 वर्षीय शास्त्री अक्सर 'हिंदू राष्ट्र' की स्थापना के समर्थन में अपने विवादास्पद बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं। अब वे कानूनी रूप से विदेशी दान स्वीकार कर सकेंगे।


एफसीआरए पंजीकरण का महत्व

एफसीआरए पंजीकरण का महत्व

एफसीआरए के तहत पंजीकरण किसी भी गैर-सरकारी संगठन या धार्मिक संस्था के लिए विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। यह पंजीकरण पांच वर्षों के लिए मान्य होता है, जिसके बाद इसे नवीनीकरण कराना पड़ता है। बागेश्वर धाम को सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक कार्यों के साथ-साथ 'धार्मिक (हिंदू)' श्रेणी में मंजूरी मिली है। इसका अर्थ है कि अब धीरेंद्र शास्त्री का संगठन विश्वभर से हिंदू धार्मिक कार्यों और समाजसेवा के लिए चंदा जुटा सकता है।


अन्य संगठनों की सूची

अन्य संगठनों की सूची

गृह मंत्रालय ने इस वर्ष 15 अप्रैल तक कुल 38 संस्थाओं को विदेशी धन प्राप्त करने की अनुमति दी है। इनमें से छह को 'धार्मिक (हिंदू)' श्रेणी में पंजीकरण मिला है। बागेश्वर धाम के अलावा, पश्चिम बंगाल के बोलपुर और बिहार के पूर्णिया में स्थित रामकृष्ण मिशन, दिल्ली का दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, कर्नाटक के धर्मस्थल का संस्थान और आगरा का राधा स्वामी सत्संग भी शामिल हैं। इसका मतलब है कि शास्त्री अब इन प्रमुख धार्मिक संगठनों की श्रेणी में आ गए हैं।


केंद्र सरकार पर उठते सवाल

केंद्र सरकार पर उठते सवाल

यह ध्यान देने योग्य है कि 2015 से अब तक 18,000 से अधिक एनजीओ के एफसीआरए पंजीकरण रद्द किए जा चुके हैं। इसके बावजूद, केंद्र सरकार ने बागेश्वर धाम को यह मंजूरी दी है। विपक्षी दलों ने सवाल उठाया है कि जब सरकार 'जबरन धर्मांतरण' और 'देश विरोधी गतिविधियों' के नाम पर एफसीआरए रद्द कर रही है, तो विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाने वाले शास्त्री को विदेशी चंदे की अनुमति क्यों दी गई। हाल ही में, सरकार ने एफसीआरए में संशोधन विधेयक पेश किया था, जिसे विपक्ष और कई राज्यों के विरोध के कारण स्थगित करना पड़ा।


गोपनीयता और चयनात्मक व्यवहार

गोपनीयता और चयनात्मक व्यवहार

द वायर की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार अक्सर गोपनीयता का हवाला देकर एफसीआरए रद्द करने के आधार साझा करने से इनकार कर देती है। कई बार प्रक्रियात्मक गलतियों या कर दाखिल न करने जैसे छोटे मामलों में भी एनजीओ के पंजीकरण रद्द हो जाते हैं। लेकिन बागेश्वर धाम जैसे संगठनों को आसानी से मंजूरी मिल गई है। आलोचकों का कहना है कि यह चयनात्मक व्यवहार है। फिलहाल, धीरेंद्र शास्त्री की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।