पश्चिम एशिया संकट: वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा
भारत और विकासशील देशों पर नकारात्मक प्रभाव
भारत सहित विकासशील देशों पर पड़ेगा नकारात्मक असर, करीब 80 करोड़ नौकरियां चढ़ेंगी तनाव की भेंट
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पश्चिम एशिया में शांति भंग होने की संभावना बढ़ गई है। 28 फरवरी के बाद से इस क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है, लेकिन हाल के दिनों में कुछ शांति देखने को मिली थी। यह तनाव न केवल युद्ध प्रभावित देशों के लिए बल्कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।
रोजगार संकट की चेतावनी
1.2 अरब लोगों के लिए मात्र 40 करोड़ रोजगार
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते भारत और अन्य विकासशील देशों में लगभग 80 करोड़ नौकरियों का संकट उत्पन्न हो सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं के बीच, विश्व बैंक ने एक बड़े रोजगार संकट की चेतावनी दी है। विश्व बैंक के प्रमुख बंगा ने बताया कि 1.2 अरब लोग कार्यबल का हिस्सा होंगे, लेकिन मौजूदा गति से केवल 40 करोड़ नौकरियां ही उत्पन्न होंगी। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती है।
यदि युद्ध की स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो बेरोजगारी में वृद्धि का खतरा भी बढ़ेगा। ऐसे में सरकारों और नीति-निर्माताओं को कई चुनौतियों का सामना करना होगा। युद्ध संकट और दीर्घकालिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। उन्होंने विकासशील देशों में रोजगार बढ़ाने के लिए नीतिगत सुधारों पर जोर दिया, जिसमें व्यापार शुरू करने में आसानी, श्रम कानूनों में सुधार, पारदर्शिता, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और बेहतर व्यापार व्यवस्था शामिल हैं।
विस्थापन और रोजगार के अवसर
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 2025 तक दुनिया भर में 11.7 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। यदि रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते हैं, तो अवैध प्रवासन जैसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं। बुनियादी ढांचे, कृषि, पर्यटन और विनिर्माण में निवेश बढ़ाकर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
