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प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रिया के चांसलर की बैठक में वैश्विक शांति पर चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर के साथ एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में वैश्विक शांति, व्यापार और निवेश पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सैन्य संघर्षों से समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता और स्थायी शांति का समर्थन किया। इस यात्रा के दौरान, दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। जानें इस यात्रा के महत्व और भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों के नए अध्याय के बारे में।
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प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रिया के चांसलर की बैठक में वैश्विक शांति पर चर्चा

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में महत्वपूर्ण बिंदु

गुरुवार को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस अवसर पर, उन्होंने मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि सैन्य संघर्षों से समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। चाहे वह यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, हम स्थायी और टिकाऊ शांति का समर्थन करते हैं। 


पीएम मोदी ने चांसलर स्टॉकर का स्वागत करते हुए कहा कि आपकी पहली भारत यात्रा पर हम आपका हार्दिक स्वागत करते हैं। यह हमारे लिए खुशी की बात है कि आपने अपनी पहली यात्रा के लिए भारत को चुना। यह आपके दृष्टिकोण और भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। चार दशकों के बाद ऑस्ट्रिया के चांसलर की भारत यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2026 में भारत-यूरोपीय संघ के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद, भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में एक नया अध्याय शुरू होगा। चांसलर स्टॉकर की यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को एक नई दिशा में ले जाएगी।


उन्होंने कहा कि अवसंरचना, नवाचार और स्थिरता के क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रिया एक भरोसेमंद साझेदार रहे हैं। दिल्ली मेट्रो से लेकर हिमालय में 10,000 फीट की ऊंचाई पर बने अटल टनल तक, ऑस्ट्रिया की सुरंग निर्माण विशेषज्ञता ने अपनी छाप छोड़ी है। रेलवे परियोजनाओं से लेकर गुजरात के गिरनार रोपवे तक, क्लीन एनर्जी और शहरी विकास में ऑस्ट्रियन कंपनियों की सक्रिय भागीदारी रही है।


पीएम मोदी ने कहा कि चांसलर स्टॉकर की यह यात्रा व्यापार और निवेश में नई ऊर्जा लाएगी। मुझे खुशी है कि वे एक बड़े विजन और व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए हैं। 


भारत की गति और पैमाने को जोड़कर, हम विश्व के लिए विश्वसनीय तकनीक और सप्लाई चेन सुनिश्चित करेंगे। हम रक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में भी अपनी साझेदारी को मजबूत करेंगे। साथ ही, हम इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के सहयोग को भी बढ़ावा देंगे। आईआईटी दिल्ली और ऑस्ट्रिया की मोंटान यूनिवर्सिटी के बीच आज हस्ताक्षरित एमओयू इस ज्ञान विनिमय का एक उदाहरण है।


पीएम मोदी ने कहा कि भारत का प्रतिभा ऑस्ट्रिया की नवाचार और उत्पादकता को बढ़ाने की क्षमता रखता है। 2023 में हमने ऑस्ट्रिया के साथ एक व्यापक माइग्रेशन और मोबिलिटी एग्रीमेंट किया था। इस एग्रीमेंट के तहत, हम नर्सिंग क्षेत्र में भी मोबिलिटी को बढ़ावा देंगे। हम संयुक्त अनुसंधान और स्टार्टअप सहयोग को भी मजबूत करेंगे। युवा आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए, हम आज भारत-ऑस्ट्रिया वर्किंग हॉलिडे प्रोग्राम भी लॉन्च कर रहे हैं।


यह एक ऐसा समझौता है जिसके तहत भारत और ऑस्ट्रिया के युवा एक-दूसरे के देश में कुछ समय के लिए रहकर काम और यात्रा कर सकते हैं।


पीएम मोदी ने कहा कि आज पूरी दुनिया एक गंभीर और तनावपूर्ण स्थिति का सामना कर रही है, जिसका प्रभाव हम सभी पर पड़ रहा है। ऐसे तनावपूर्ण वैश्विक माहौल में, भारत और ऑस्ट्रिया एकमत हैं कि सैन्य संघर्षों से समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। हम स्थायी और टिकाऊ शांति का समर्थन करते हैं। इसके साथ ही, हम इस बात पर भी सहमत हैं कि बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए वैश्विक संस्थानों का सुधार आवश्यक है और आतंकवाद को समाप्त करना हमारी साझा प्रतिबद्धता है। 2024 में मेरी ऑस्ट्रिया की यात्रा के बाद, आज ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर का भारत में स्वागत करना हमारे लिए गर्व की बात है।