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प्रधानमंत्री मोदी ने माधवपुर मेले में भाग लेने की अपील की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के पोरबंदर में चल रहे माधवपुर मेले के सांस्कृतिक महत्व पर जोर देते हुए लोगों से इस उत्सव में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने इस मेले को 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना का प्रतीक बताया, जो विभिन्न परंपराओं को एक साथ लाता है। इस मेले का आयोजन भारत सरकार और गुजरात सरकार द्वारा किया जा रहा है, जिसमें लोक नृत्य, संगीत और खरीदारी का आनंद लिया जा रहा है। जानें इस मेले के बारे में और क्या खास है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने माधवपुर मेले में भाग लेने की अपील की

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में गुजरात के पोरबंदर में चल रहे माधवपुर मेले के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस मेले के सांस्कृतिक महत्व पर जोर देते हुए सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया और राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता पर बल दिया।


माधवपुर मेले का महत्व

मोदी ने कहा, "माधवपुर मेला हमारी समृद्ध संस्कृति को प्रदर्शित करता है और यह गुजरात तथा पूर्वोत्तर के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करता है। यह उत्सव विभिन्न परंपराओं को एकत्रित करता है, जो 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को दर्शाता है।" उन्होंने लोगों से इस मेले में भाग लेने की अपील की।


खरीदारी और सांस्कृतिक कार्यक्रम

पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, माधवपुर मेला एक विविध सांस्कृतिक उत्सव है, जो रुक्मिणी और कृष्ण की गाथा के माध्यम से मानवीय संबंधों का जश्न मनाता है। मेले के तीसरे दिन, लोक नृत्य, संगीत और खरीदारी का माहौल बना हुआ है।


आयोजन का स्थान

यह उत्सव भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और गुजरात सरकार द्वारा पोरबंदर जिले के माधवपुर घेड़ में आयोजित किया जा रहा है। यह रुक्मिणी की यात्रा का जश्न मनाता है, जो उन्होंने भगवान कृष्ण के साथ अरुणाचल प्रदेश से गुजरात तक की थी।


एकता का प्रतीक

माधवपुर मेला प्रधानमंत्री मोदी के 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' अभियान का प्रतीक है, जो देश की विविधता में एकता को दर्शाता है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छात्रों, खेल और संस्कृति के स्तर पर एक-दूसरे के साथ जोड़ा गया है।


माधवपुर घेड़ का परिचय

माधवपुर घेड़, जो पोरबंदर के निकट स्थित है, एक सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण गांव है। यहाँ भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के विवाह की कथा प्रचलित है। इस स्थान पर 15वीं सदी का माधवराय मंदिर भी है।


सांस्कृतिक मेले की परंपरा

हर साल राम नवमी के दिन इस सांस्कृतिक मेले का आयोजन किया जाता है। कृष्ण की प्रतिमा को लेकर एक रंग-बिरंगा रथ पूरे गांव में घुमाया जाता है, और यह उत्सव पांच दिनों तक चलता है।