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प्रधानमंत्री सेतु योजना: 1,000 सरकारी आईटीआई का आधुनिकीकरण

प्रधानमंत्री सेतु योजना के तहत 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक बनाने की घोषणा की गई है। इस योजना का उद्देश्य युवाओं को उद्योग-अनुकूल कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि हो सके। योजना के अंतर्गत, 200 आईटीआई को हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि 800 आईटीआई को स्पोक के रूप में जोड़ा जाएगा। इस पहल में उद्योगों की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा उद्योग परामर्श कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
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प्रधानमंत्री सेतु योजना: 1,000 सरकारी आईटीआई का आधुनिकीकरण

नई दिल्ली में पीएम-सेतु योजना की घोषणा

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री सेतु (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई) योजना के अंतर्गत, देशभर में 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को आधुनिक बनाने का निर्णय लिया गया है। यह जानकारी शनिवार को कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा साझा की गई।


मंत्रालय के अनुसार, इस योजना में हब-एंड-स्पोक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा, जिसमें 200 आईटीआई को हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां उन्नत मशीनरी, आधुनिक भवन और नई तकनीक के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही, 800 आईटीआई को स्पोक के रूप में जोड़ा जाएगा, ताकि जिलों में प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध हो सके।


कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) इस योजना को महाराष्ट्र सरकार के सहयोग से लागू कर रहा है। योजना के प्रारंभ में पुणे में एक बड़ा उद्योग परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।


इस पहल का मुख्य उद्देश्य उद्योगों को योजना से जोड़ना और उन्हें कार्यान्वयन में भागीदार बनाना है, ताकि प्रशिक्षण उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप हो सके।


मंत्रालय के अनुसार, इस परामर्श कार्यक्रम में 50 से अधिक योग्य कंपनियां भाग लेंगी, जो निर्माण, कपड़ा, ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, तेल और गैस, और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों से संबंधित होंगी।


पीएम-सेतु योजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में किया था, जिसका उद्देश्य सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक बनाकर उद्योग-अनुकूल बनाना है, ताकि युवाओं को विश्वस्तरीय कौशल प्रशिक्षण मिल सके और उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि हो।


इस योजना के तहत आईटीआई सरकारी स्वामित्व में रहेंगे, लेकिन उनका संचालन उद्योगों की भागीदारी से किया जाएगा। इससे युवाओं को मांग के अनुसार प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और नौकरी पाने में सहायता मिलेगी।


अधिकारियों के अनुसार, यह परामर्श कार्यक्रम उद्योगों को दीर्घकालिक कौशल विकास व्यवस्था का हिस्सा बनने का अवसर प्रदान करेगा, जिससे वे प्रशिक्षण से जुड़े निर्णयों और संचालन में भी भूमिका निभा सकेंगे।


इस दौरान कई समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी किया जाएगा, जिससे उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत किया जा सके।


इन समझौतों में महाराष्ट्र सरकार के व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण निदेशालय (डीवीईटी) का फिएट इंडिया, श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया और अनुदीप फाउंडेशन के साथ समझौता शामिल होगा। इसके अलावा, डीवीईटी और एसडीएन/वाधवानी के बीच भी साझेदारी की जाएगी।


इस क्लस्टर मॉडल के माध्यम से उद्योग सीधे संस्थानों के संचालन में योगदान दे सकेंगे, जिससे प्रशिक्षण को श्रम बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जा सकेगा, पाठ्यक्रम में सुधार होगा, शिक्षकों को नई तकनीक का प्रशिक्षण मिलेगा और अप्रेंटिसशिप व नौकरी के अवसर मजबूत होंगे।