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बिहार में गेहूं की सरकारी खरीद की तैयारी, किसानों को मिलेगी राहत

बिहार सरकार ने एक अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू करने का निर्णय लिया है, जिसमें किसानों को 2585 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य मिलेगा। इस बार केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में 160 रुपये की वृद्धि की है। किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया पहले से शुरू की जा चुकी है। सहकारिता विभाग ने खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सभी तैयारियां की हैं। जिलाधिकारियों को निगरानी का कार्य सौंपा गया है, और किसानों की सहायता के लिए हेल्पलाइन भी उपलब्ध है।
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बिहार में गेहूं की सरकारी खरीद की तैयारी, किसानों को मिलेगी राहत

बिहार में गेहूं की खरीद की शुरुआत


पटना: बिहार के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना आई है। राज्य सरकार ने एक अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू करने का निर्णय लिया है। इस बार केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में 160 रुपये की वृद्धि करते हुए इसे 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। सहकारिता विभाग ने खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिलाधिकारियों को इस प्रक्रिया की निगरानी का कार्य सौंपा गया है।


न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि

इस वर्ष गेहूं की खरीद के लिए केंद्र सरकार ने 2585 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 160 रुपये अधिक है, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ होगा। बिहार सरकार ने इस सीजन में 18 हजार टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए पैक्सों, व्यापार मंडलों और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की एजेंसियां सक्रिय रूप से काम करेंगी।


पंजीकरण और पोर्टल की व्यवस्था

सरकारी खरीद का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिन्होंने कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर अपना पंजीकरण सफलतापूर्वक कराया है। पंजीकरण की प्रक्रिया 21 जनवरी से शुरू हो चुकी थी ताकि सत्र शुरू होने से पहले सभी आंकड़े तैयार रहें। पोर्टल पर दर्ज जानकारी के आधार पर ही किसानों से अनाज लिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक उत्पादकों को ही एमएसपी का लाभ मिले और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो सके।


पैक्स और व्यापार मंडलों की भूमिका

राज्य के सहकारिता विभाग ने गेहूं खरीद के लिए सभी आवश्यक इंतजाम कर लिए हैं। मुख्य रूप से प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) और व्यापार मंडलों के माध्यम से अनाज का उठाव किया जाएगा। भारतीय खाद्य निगम भी इस पूरी खरीद प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विभिन्न केंद्रों की स्थापना इस प्रकार की जा रही है ताकि किसानों को अपने अनाज बेचने के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।


भुगतान की प्रक्रिया और निगरानी

किसानों की सबसे बड़ी चिंता फसल बेचने के बाद पैसे मिलने में देरी होती है। इसे दूर करने के लिए सरकार ने निर्देश दिए हैं कि गेहूं की खरीद के 48 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खातों में भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारियों को इस प्रक्रिया की निगरानी करने के लिए कहा गया है ताकि किसानों को किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक समस्या का सामना न करना पड़े।


किसानों की सहायता के लिए हेल्पलाइन

किसानों को खरीद प्रक्रिया के दौरान किसी भी समस्या के समाधान के लिए सहकारिता विभाग ने एक हेल्पलाइन नंबर 0612-2200693 जारी किया है। इस नंबर पर किसान अपनी अनाज बिक्री से संबंधित जानकारी या शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा, कृषि विभाग के पोर्टल पर भी विस्तृत निर्देश उपलब्ध हैं। विभाग का प्रयास है कि कोई भी जरूरतमंद किसान सूचना के अभाव में सरकारी एमएसपी का लाभ न खोए।