बिहार में नई एनडीए सरकार का गठन: सम्राट चौधरी लेंगे शपथ
बिहार की राजनीति में नया अध्याय
पटना: बिहार की राजनीतिक परिदृश्य में एक नया युग शुरू होने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में नई एनडीए सरकार 15 अप्रैल 2026 को अपने कार्यभार की शुरुआत करेगी। राज्य के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कल लोकभवन में एक साधारण समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। हालांकि, राजनीतिक हलकों में कैबिनेट की संभावित सूची को लेकर चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि कल केवल तीन नेता शपथ लेने वाले हैं।
प्रशासनिक तैयारियों और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल सैयद अता हसनैन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के दो वरिष्ठ नेताओं को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाएंगे। इनमें अनुभवी नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी शामिल हैं। मंत्रिमंडल का यह संक्षिप्त स्वरूप चौंकाने वाला है, लेकिन इसके पीछे गठबंधन के भीतर चल रही गहन चर्चाओं को मुख्य कारण माना जा रहा है। विजय कुमार चौधरी ने हाल ही में संकेत दिए थे कि मंत्रियों की सूची और विभागों के बंटवारे पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है।
कैबिनेट विस्तार की योजना
4 मई के बाद होगा कैबिनेट विस्तार
भाजपा और एनडीए के रणनीतिकारों ने मंत्रिमंडल विस्तार को फिलहाल टालने की योजना बनाई है। सूत्रों के अनुसार, सम्राट चौधरी विधानसभा का सत्र बुलाकर पहले अपना बहुमत साबित करेंगे। इसके बाद, 4 मई को पश्चिम बंगाल, असम और अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद ही मंत्रिमंडल का पूर्ण विस्तार किया जाएगा। इस विस्तार में भाजपा और जदयू के अलावा सहयोगी दलों, जैसे चिराग पासवान की लोजपा-रामविलास, जीतनराम मांझी की 'हम' और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो के नेताओं को भी शामिल किया जाएगा। चर्चा है कि पुराने मंत्रियों में से अधिकांश को फिर से मौका मिल सकता है।
विभागों का बंटवारा और स्पीकर का पद
विभागों की रस्साकशी और स्पीकर का पद
एनडीए के भीतर मंत्रियों की संख्या और महत्वपूर्ण विभागों को लेकर बातचीत का दौर अभी भी जारी है। भाजपा और जदयू के बीच प्रारंभिक सहमति बनने के बाद ही छोटे सहयोगी दलों से संवाद किया जाएगा। इसके अलावा, विधानसभा अध्यक्ष के पद को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। वर्तमान में इस पद पर भाजपा के प्रेम कुमार आसीन हैं, लेकिन नई सत्ता व्यवस्था में इस पद को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच 'लेन-देन' की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
